Ranveer Singh Latest: एक ऐसे उद्योग में जहां सफलता को अक्सर आंकड़ों से मापा जाता है, ऐसे ऐतिहासिक पल बहुत कम आते हैं. जब आंकड़े खुद इतिहास बन जाते हैं. धुरंधर (Dhurandhar) के साथ रणवीर सिंह (Ranveer Singh) ने वह कर दिखाया है जो भारतीय सिनेमा में आज तक कोई और अभिनेता नहीं कर पाया. एक ही भाषा, हिंदी में, अब तक की सबसे ज्यादा कलेक्शन करने वाली फिल्म देना. यह कोई बॉक्स-ऑफिस उपलब्धि नहीं, बल्कि एक ऐसा मील का पत्थर है जो उन्हें एक अलग ही मुकाम पर खड़ा करता है.
हफ्तों तक टिके रहकर
धुरंधर ने सिर्फ जबरदस्त ओपनिंग ही नहीं ली बल्कि हफ्तों तक टिके रहकर और भी फैलते हुए, लगातार बॉक्स ऑफिस पर अपना दबदबा बनाए रखा. रणवीर ध्यान खींचने के लिए शोर या दिखावे पर निर्भर नहीं रहते; उनकी पकड़ नियंत्रण से आती है. यही संतुलन मास अपील की तीव्रता और अभिनय की सूक्ष्मता के बीच उन्हें इतनी विशाल फिल्म का भार उठाने के बावजूद किरदार को पूरी सांस लेने की जगह देता है. ट्रेड एनालिस्ट्स और दर्शकों की राय एक बात पर एकमत है. धुरंधर के साथ रणवीर सिंह ने खुद को इस पीढ़ी का बेहतरीन अभिनेता साबित किया है. सिर्फ एक स्टार के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे कलाकार के रूप में जिस पर दर्शक भरोसा करते हैं कि वह बड़े कैनवास की कहानी में भी गहराई लेकर आएगा. दर्शक सिर्फ अनुभव के लिए नहीं, बल्कि अभिनय के लिए दोबारा सिनेमाघरों में लौटे जो आज के दौर में बेहद दुर्लभ है. यह उपलब्धि सिर्फ अपने विशाल पैमाने के कारण नहीं, बल्कि अपनी यात्रा के कारण भी खास है. धुरंधर ने किसी क्षणिक उछाल पर भरोसा नहीं किया, बल्कि धीरे-धीरे मजबूत होती गई, अपनी पकड़ बनाए रखी और हफ्तों तक शानदार प्रदर्शन करती रही. फिल्म ने अपने पांचवें मंगलवार (33वें दिन) को भारत में 831.40 करोड़ रुपये की नेट कलेक्शन का आंकड़ा छू लिया, जो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक नया मील का पत्थर है.
किरदार पर्दे तक सीमित नहीं
सांस्कृतिक स्तर पर भी इसका प्रभाव उतना ही गहरा रहा हम्जा का किरदार पर्दे तक सीमित नहीं रहा. वह जनमानस का हिस्सा बन गया और बॉक्स-ऑफिस आंकड़ों से कहीं आगे जाकर चर्चाओं का केंद्र बना. जब कोई भूमिका फ़िल्म से बाहर निकलकर अपनी पहचान बना ले, तो वह सिर्फ सफलता नहीं बल्कि गहरी संवेदनात्मक जुड़ाव का संकेत होता है. यही जुड़ाव अब आगे की उम्मीदों में बदल चुका है, जहां दर्शक बेसब्री से देखना चाहते हैं कि रणवीर अगली बार अपनी दुनिया को किस तरह नया आकार देते हैं. धुरंधर के साथ रणवीर सिंह ने सिर्फ एक रिकॉर्ड अपने नाम नहीं किया. उन्होंने खुद को शिखर पर स्थापित कर दिया है. ट्रेंड्स का पीछा करके नहीं, बल्कि नए मानक स्थापित करके. यही सच्चा वर्चस्व है, जब कला आगे चलती है, जनता उसके पीछे आती है, और इतिहास उसे दर्ज कर लेता है.
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