Bollywood Film Makers: जहां दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) और आलिया भट्ट (Alia Bhatt) अंतरराष्ट्रीय रेड कार्पेट्स और ग्लोबल सुर्खियों में लगातार छाई रहती हैं, वहीं भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में असली और कहीं अधिक गहरा बदलाव कैमरे के पीछे हो रहा है. महिला क्रिएटर्स चुपचाप लेकिन प्रभावशाली तरीके से कहानी कहने, स्केल और महत्वाकांक्षा के नियमों को दोबारा लिख रही हैं और भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर नई दिशा दे रही हैं.
ग्लोबल अवॉर्ड जीतने तक
गुनीत मोंगा ने इंडिपेंडेंट आवाजों को मंच देने से लेकर ग्लोबल अवॉर्ड जीतने तक, मोंगा ने एक ऐसा प्रोड्यूसर मॉडल तैयार किया है जो भारतीय जड़ों से जुड़ी कहानियों को यूनिवर्सल इमोशनल अपील के साथ प्रस्तुत करता है. इस बात का प्रमाण हैं कि जब सच्चाई और मौलिकता को दृढ़ विश्वास के साथ पेश किया जाए, तो वह किसी भी भव्यता से आगे निकल सकती है. भारत के ओटीटी रिवोल्यूशन के केंद्र में कनिका ढिल्लों हैं, जिन्होंने यह पूरी तरह बदल दिया है कि मेनस्ट्रीम हिंदी सिनेमा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स से कैसे जुड़ता है. लेखिका और निर्माता दोनों भूमिकाओं में, अपने प्रोडक्शन के जरिए, कनिका ढिल्लों डिजिटल स्पेस की सबसे व्यावसायिक रूप से सफल और प्रभावशाली आवाजों में से एक बन चुकी हैं. नेटफ्लिक्स पर ग्लोबल स्तर पर टॉप परफॉर्म करने वाली फिल्मों में शामिल रही. यह साबित करते हैं कि महिला-केंद्रित थ्रिलर्स और भावनात्मक रूप से जटिल कहानियां न सिर्फ लोकप्रिय संस्कृति पर राज कर सकती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से भी गहरा जुड़ाव बना सकती हैं.
वैश्विक स्तर पर
जोया अख्तर ने भी भारत की सांस्कृतिक पहुंच को वैश्विक स्तर पर विस्तारित करने में अहम भूमिका निभाई है. रीमा कागती का काम लॉन्ग-फॉर्म स्टोरीटेलिंग पर उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है. उनकी फिल्मों की कहानियां सामाजिक यथार्थ और ग्लोबल क्राइम-ड्रामा सेंसिबिलिटी का संतुलित मिश्रण पेश करती हैं. मेघना गुलजार लगातार राजनीतिक संदर्भ और भावनात्मक सच्चाई के बीच संतुलन साधती रही हैं. उनकी आगामी क्राइम थ्रिलर दायरा, जिसमें करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन नजर आएंगे.
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