Priyadarshan Birthday: बॉलीवुड में कॉमेडी की बात हो और प्रियदर्शन (Priyadarshan) का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. सादे से कथानक को हास्य की सोने की खान में बदल देने वाले प्रियदर्शन उन गिने-चुने निर्देशकों में शामिल हैं, जो दर्शकों से हंसी का वादा करते हैं और उसे हर बार पूरा भी करते हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर यह चर्चा जरूरी हो जाती है कि एकता कपूर की ‘भूत बंगला' के साथ उनकी वापसी क्यों 90 के दशक में पले-बढ़े हर दर्शक को उत्साहित कर रही है. प्रियदर्शन वह निर्देशक हैं, जिनकी फिल्में सिर्फ देखी नहीं गईं, बल्कि याद की गईं, संवादों में दोहराई गईं और पीढ़ियों तक सेलिब्रेट की गईं. ऐसे दौर में जब कॉमेडी अक्सर शोरगुल या फूहड़पन पर निर्भर होती है, प्रियदर्शन ने सटीक टाइमिंग, दमदार एन्सेम्बल कास्ट और नियंत्रित अराजकता के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. उनकी फिल्मों में फैला हुआ हास्य अव्यवस्थित नहीं, बल्कि बेहद सुनियोजित होता है.
वापसी कर रहे
अब प्रियदर्शन एक बार फिर ‘भूत बंगला' के जरिए वापसी कर रहे हैं, जिसमें उनके साथ हैं अक्षय कुमार, यह वही निर्देशक-अभिनेता की जोड़ी है, जिसने हेरा फेरी, गरम मसाला, भागम भाग और भूल भुलैया जैसी आइकॉनिक कॉमेडी फिल्में दी हैं. इन फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाई, बल्कि भारतीय सिनेमा में कॉमेडी का पैमाना ही बदल दिया. प्रियदर्शन की फिल्मों को दर्शकों का प्यार मिलने के पीछे कई कारण हैं, लेकिन सबसे खास बात यह है कि उनकी कॉमेडी कभी शोर नहीं मचाती, बल्कि दिमाग से काम करती है. उनके संवाद आम बोलचाल की भाषा का हिस्सा बन चुके हैं. आइए नजर डालते हैं उन खास तत्वों पर, जो प्रियदर्शन की फिल्मों को यादगार बनाते हैं.
कॉमिक टाइमिंग का संतुलन
प्रियदर्शन की सबसे बड़ी ताकत है ‘नियंत्रित अराजकता', हेरा फेरी की अपहरण वाली कहानी हो या भागम भाग की पहचान की गड़बड़ियां, उनकी फिल्मों में एक झूठ दूसरे झूठ को जन्म देता है और हर गलतफहमी हास्य का नया स्तर बना देती है. घटनाएं डोमिनोज की तरह गिरती हैं और दर्शक हंसते-हंसते खुद को रोक नहीं पाते. यही वह जादू है, जिसने हेरा फेरी के संवादों को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया. जब बॉलीवुड में हॉरर-कॉमेडी का चलन भी नहीं था, तब प्रियदर्शन ने भूल भुलैया के जरिए इस जॉनर को परिभाषित किया. उन्होंने साबित किया कि डर और हंसी एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही तनाव के दो पहलू हैं. मनोवैज्ञानिक रहस्य और अक्षय कुमार की शानदार कॉमिक टाइमिंग का संतुलन आज भी मिसाल माना जाता है. अब भूत बंगला के साथ प्रियदर्शन उसी शैली में वापसी कर रहे हैं, जिसे उन्होंने खुद लोकप्रिय बनाया था.
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