Bollywood News: भारतीय सिनेमा का साहित्य के साथ हमेशा से गहरा और समृद्ध रिश्ता रहा है. चर्चित उपन्यासों, कहानियों और ऐतिहासिक ग्रंथों से प्रेरणा लेकर यहां कई भव्य और भावनात्मक फिल्में बनाई गई हैं. इनमें पीरियड ड्रामा अपनी भव्यता, सांस्कृतिक गहराई के कारण खास पहचान रखते हैं. यहां प्रस्तुत हैं लोकप्रिय पुस्तकों पर आधारित बेहतरीन पीरियड ड्रामा फिल्में, ऐसी जिन्होंने न सिर्फ अपने साहित्यिक स्रोत का सम्मान किया, बल्कि सिनेमा के इतिहास में भी अपनी अलग जगह बनाई.
गंगूबाई काठियावाड़ी (2022)
संजय लीला भंसाली ने गंगूबाई की जिंदगी को नए सिरे से परदे पर उतारा. एक कोठे की मालकिन, जो कमाठीपुरा में महिलाओं के अधिकारों की मजबूत आवाज बनकर उभरी. यह फिल्म भले ही पारंपरिक पीरियड रोमांस न हो, लेकिन 1960 के दशक की पृष्ठभूमि, भव्य प्रोडक्शन डिजाइन और आलिया भट्ट का सशक्त अभिनय इसे जैदी की चर्चित किताब से प्रेरित एक आधुनिक क्लासिक बनाता है.
देवदास (2002)
भंसाली की देवदास शरतचंद्र के अमर प्रेम-त्रासदी की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मी रूपांतरणों में से एक मानी जाती है. भव्य सेट, यादगार संगीत और शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय बच्चन व माधुरी दीक्षित के शानदार अभिनय ने 1917 के इस उपन्यास को एक भव्य सिनेमाई महाकाव्य में बदल दिया.
परिणीता (2005)
प्रदीप सरकार की यह पहली फिल्म 1960 के दशक के कोलकाता में रची-बसी एक कोमल और सुरमयी प्रेम कहानी है. विद्या बालन का चमकदार अभिनय, सैफ अली खान का आकर्षण और फिल्म की काव्यात्मक दृश्य-भाषा इसे हिंदी सिनेमा की सबसे सजीव और साहित्यिक रूपांतरणों में शामिल करती है.
पद्मावत (2018)
16वीं सदी के महाकाव्य से प्रेरित भंसाली की पद्मावत रानी पद्मावती की कथा को भव्य दृश्यों, शानदार परिधानों और सम्मान व बलिदान की नाटकीय कहानी के साथ प्रस्तुत करती है. दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर और रणवीर सिंह ने इस कथा को प्रभावशाली अभिनय से जीवंत किया.
बाजीराव मस्तानी (2015)
मराठा योद्धा पेशवा बाजीराव और उनकी दूसरी पत्नी मस्तानी के प्रेम की यह कहानी, भंसाली के निर्देशन में एक दृश्यात्मक रूप से समृद्ध महाकाव्य बन जाती है. रोमांस, युद्ध और दरबारी राजनीति का संगम रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा के दमदार अभिनय से और भी सशक्त हो उठता है.
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