Rishab Shetty Latest: ऐसे दौर में, जहां रचनात्मक करियर अक्सर विशेषज्ञता तक सीमित हो जाते हैं, ऋषभ शेट्टी उन गिने-चुने समकालीन फिल्मकारों में से हैं जो अभिनेता, लेखक और निर्देशक तीनों भूमिकाओं को समान आत्मविश्वास और प्रतिबद्धता के साथ निभाते हैं. भारतीय सिनेमा ने राज कपूर और गुरु दत्त जैसे महान नाम देखे हैं, जिन्होंने अपनी ही फिल्मों में लेखन, निर्देशन और अभिनय करते हुए कृतियां रचीं. उनके बाद बहुत कम कलाकार इस कठिन रचनात्मक संतुलन को उसी स्तर और प्रभाव के साथ साध पाए हैं. ऋषभ शेट्टी उन दुर्लभ अपवादों में शामिल हैं.
वास्तव में अलग बनाता
ऋषभ शेट्टी को वास्तव में अलग बनाता है सिर्फ उनकी प्रतिभा नहीं, बल्कि उनकी कहानी कहने की प्रामाणिकता है. उनकी कहानियां सांस्कृतिक जड़ों, जिए हुए अनुभवों और गहरे भावनात्मक बोध से जन्म लेती हैं, जिससे वह उन पात्रों को स्वयं निभाते हैं जिन्हें उन्होंने शुरुआत से कल्पित और गढ़ा होता है. कांतारा का फिनॉमेनन उनके सफर का एक निर्णायक पड़ाव बनकर उभरा. यह फिल्म सिर्फ बॉक्स ऑफिस की सफलता नहीं थी, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन थी, जिसने स्वदेशी कहानी-कथन, लोककथाओं और आध्यात्मिक चेतना को मुख्यधारा सिनेमा के केंद्र में ला दिया. कांतारा ने वैश्विक स्तर पर दर्शकों से जुड़ाव बनाया और यह साबित किया कि जड़ों से जुड़ी कहानियां की अपील हासिल कर सकती हैं. इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए, कांतारा चैप्टर 1 ने सिनेमैटिक यूनिवर्स को और विस्तार दिया, जिससे फ्रैंचाइजी का पैमाना, दृष्टि और भावनात्मक गहराई और मजबूत हुई.
बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
कांतारा और कांतारा चैप्टर 1 दोनों ने मिलकर विश्वभर में 1300 करोड़ रुपये से अधिक का असाधारण वैश्विक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन हासिल किया है. यह ऐतिहासिक उपलब्धि ऋषभ शेट्टी को भारतीय सिनेमा का ऐसा एकमात्र अभिनेता-लेखक-निर्देशक बनाती है, जिसने इस रचनात्मक क्षमता में इतनी विशाल वैश्विक सफलता प्राप्त की हो. ऋषभ शेट्टी का सफ़र दृष्टि, साहस और शिल्प के दुर्लभ संगम का प्रतिनिधित्व करता है. आज के सिनेमाई परिदृश्य में वह उन दिग्गजों द्वारा परिभाषित विरासत के आधुनिक ध्वजवाहक के रूप में खड़े हैं, और यह नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं कि एक संपूर्ण फिल्मकार होने का वास्तविक अर्थ क्या होता है.
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