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नवापारा में जल संकट का आपातकाल: कुएं में उतरकर पानी भरने को मजबूर, एक बाल्टी के लिए रात भर डेरा डालते हैं लोग

भीषण गर्मी में नवापारा के लोगों के लिए पानी "अस्तित्व की लड़ाई" बन गया है. ग्राम पंचायत लोहारी का ये पूरा गांव एकमात्र कुएं पर निर्भर है और हालात इतने बुरे हैं कि लोग जान जोखिम में डालकर कई मीटर नीचे उतरकर बर्तन भर रहे हैं.

Manendragarh-Chirmiri-Bharatpur Water Crisis: छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले की ग्राम पंचायत लोहारी के नवापारा में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है. हालात इतने भयावह हैं कि लोग पीने के पानी के लिए कुएं के अंदर उतरने को मजबूर हैं. भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों की दिनचर्या अब पानी की तलाश तक सिमट गई है. कोई रात एक बजे तक पानी ढो रहा है तो कोई सुबह चार बजे से बर्तनों के साथ कुएं के पास डेरा डाल देता है. इसके बावजूद कई परिवारों को पर्याप्त पानी नसीब नहीं हो पा रहा. नवापारा में पानी का संकट सिर्फ परेशानी नहीं बल्कि लोगों के अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है.

गांव के एकमात्र कुएं पर सुबह से देर रात तक लोगों की लंबी कतारें लगी रहती हैं. कुएं में पानी का स्तर इतना नीचे चला गया है कि ग्रामीणों को कई मीटर नीचे उतरकर बर्तन भरने पड़ रहे हैं. कई बार घंटों इंतजार के बाद भी लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है. स्थानीय निवासी इंद्रकुमार बताते हैं कि पानी की समस्या ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है.

दोपहर से पानी भरते-भरते हो जाती है रात

दोपहर बारह बजे से लोग पानी भरने की तैयारी शुरू कर देते हैं और कई बार रात बारह बजे तक इंतजार करना पड़ता है. इसके बावजूद पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता. ग्रामीण गुनोतिया सिंह के अनुसार, गांव में हर दिन पानी को लेकर संघर्ष होता है. कोई देर रात तक पानी ढोता है तो कोई तड़के सुबह उठकर लाइन में लग जाता है. दिनभर की मेहनत के बाद भी लोगों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है.

पूरा गांव एक कुएं पर निर्भर

दिनेश बताते हैं कि करीब 300 की आबादी वाला पूरा गांव इसी एक कुएं पर निर्भर है. पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है और लोग जान जोखिम में डालकर कुएं के भीतर उतर रहे हैं. इसके बाद भी सभी को पानी मिल जाए इसकी कोई गारंटी नहीं है. ग्रामीण इंद्रपाल सिंह का कहना है कि गांव में पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि लोगों की नींद तक छिन गई है. दिन हो या रात लोग सिर्फ पानी के इंतजार में लगे रहते हैं. जो पानी मिलता भी है वह गंदा और मिट्टीयुक्त होता है. उसे छानकर पीना पड़ता है.

पानी के टैंकर की व्यवस्था की गई

हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को कुएं के अंदर उतरकर पानी निकालना पड़ रहा है. इस गंभीर संकट के बीच जल जीवन मिशन की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है. ग्राम पंचायत लोहारी के सरपंच मोती सिंह ने बताया कि स्थिति को देखते हुए पिछले एक सप्ताह से टैंकर के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है. उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई पानी टंकी में लीकेज है जिसकी जानकारी अधिकारियों को पहले ही दी जा चुकी है.

500 से 600 फीट गहराई में पानी

नवापारा पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जहां 500 से 600 फीट गहराई में पानी मिलने की संभावना रहती है. गांव में कराए गए अधिकांश बोर फेल हो चुके हैं और केवल एक-दो बोर ही सफल हुए हैं. मामला सामने आने के बाद एमसीबी कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने कहा कि यह समस्या उनके संज्ञान में आई है. उन्होंने बताया कि दौरे के दौरान क्षेत्र में खेती-बाड़ी होती देखी गई थी, लेकिन यदि किसी विशेष पारा में जल संकट की स्थिति है तो उसका तत्काल निराकरण कराया जाएगा.

कलेक्टर ने दिया पानी का आश्वासन

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की कलेक्टर संतन देवी जांगड़ेने आश्वासन दिया कि यदि क्षेत्र में ड्राई जोन जैसी स्थिति बनी हुई है तो जल्द पानी की वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाएगी. साथ ही जल जीवन मिशन की जिस टंकी में लीकेज की शिकायत है. उसकी जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की योजनाओं और जल जीवन मिशन के दावों के बावजूद आखिर नवापारा के लोग आज भी कुएं के तल में उतरकर पानी क्यों खोज रहे हैं. जब सरकारी टंकियां लीकेज कर रही हों और ग्रामीण रातभर जागकर एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हों, तब विकास के दावों की हकीकत खुद बयां हो जाती है.

न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के कार्यकारी अभियंता (EE) आकाश पोद्दार ने बताया, "मैंने और वरिष्ठ अधिकारियों ने दिन में उस जगह का निरीक्षण किया और पाया कि पूरे गांव में पानी की आपूर्ति हो रही थी. इस बात की मैंने व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की. हालांकि, PMGSY योजना के तहत निर्माण कार्य के दौरान पानी की वितरण लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी. नतीजतन, पानी स्टोरेज टैंक तक तो पहुंच रहा है, लेकिन घरों तक नहीं पहुंच पा रहा है. विभाग ने इस मामले को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अधिकारियों के ध्यान में लाया है और उन्हें जल्द से जल्द इस समस्या को ठीक करने का निर्देश दिया है."

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