Water Crisis in Madhya Pradesh : मध्य प्रदेश के 413 नगरीय निकायों (Municipal Corporation) में से 162 निकायों में प्रतिदिन पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है. वहीं, 8 निकाय ऐसे हैं, जहां दो दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जो रही है. हालात इतने खराब होते जा रहे हैं कि न्यायधानी जबलपुर (Jabalpur) के 2 निकायों में तीन दिन में एक बार पानी की सप्लाई की जा रही है. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश की पानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसके मुताबिक जबलपुर संभाग के कुल 56 निकायों में से केवल 46 में ही रोज पानी की सप्लाई हो रही है.

इंदौर और उज्जैन संभाग में भी पानी का संकट
प्रदेश की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले इंदौर संभाग में भी हालात चिंताजनक हैं. यहां 55 में से 42 नगरीय निकायों में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जा रही है. यानी लगभग 76 फीसदी शहरों में नियमित पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है. उज्जैन संभाग में भी 67 में से 43 निकायों में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई हो रही है. यानी यहां भी करीब 64 फीसदी शहर जल संकट से प्रभावित हैं.
राजधानी भोपाल में भी गहरा रहा है जल संकट
राजधानी भोपाल संभाग में 43 में से 17 निकायों में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई हो पा रही है, जबकि जावर-MPUDC और मंडीदीप में दो दिन छोड़कर जल की आपूर्ति की जाती है. लगातार बढ़ती गर्मी और जल स्रोतों पर दबाव के कारण आने वाले दिनों में संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है.

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राज्य में नौतपा की शुरुआत हो चुकी है. नौतपा के पहले दिन मंगलवार को मध्य प्रदेश के निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना में तीव्र लू का रेड अलर्ट जारी किया गया. इस दौरान खजुराहो और नौगांव सबसे गर्म रहे, यहां तापमान लगातार 45 डिग्री के पार बना हुआ है.
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