MGNREGA Name Change Protest: राजनांदगांव में मनरेगा को लेकर सियासत तेज हो गई है. केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदले जाने और उसमें किए गए बदलावों के विरोध में कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर आंदोलन किया. शहर के लखोली बाइपास चौक के पास कांग्रेस ने मनरेगा बचाव संग्राम के तहत एकदिवसीय धरना‑प्रदर्शन किया और नेशनल हाईवे‑53 पर सांकेतिक चक्काजाम कर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की. इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहे.
मनरेगा के नाम और स्वरूप में बदलाव पर आपत्ति
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण कर दिया है और योजना के स्वरूप में भी कई बदलाव किए गए हैं. कांग्रेस का कहना है कि इन बदलावों से ग्रामीण मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे और गरीबों को मिलने वाला रोजगार प्रभावित होगा. इसी के विरोध में यह धरना‑प्रदर्शन और चक्काजाम किया गया.
धरना‑प्रदर्शन और सांकेतिक चक्काजाम
लखोली बाइपास चौक पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पहले धरना दिया, फिर कुछ देर के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग‑53 पर सांकेतिक चक्का जाम किया. इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए और मनरेगा को पुराने स्वरूप में बनाए रखने की मांग की गई. माहौल पूरी तरह विरोधी रहा, हालांकि प्रशासन की मौजूदगी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ.
ग्रामीण जनता से धोखे का आरोप
धरना‑प्रदर्शन के दौरान पूर्व महापौर हेमा देशमुख ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि जिस तरह महात्मा गांधी जी के नाम से जुड़ी योजना का नाम बदला गया है, वह ग्रामीण जनता के साथ धोखे जैसा है. उनका कहना था कि नाम बदलकर सरकार लोगों को भ्रमित कर रही है, जबकि असल मुद्दा मजदूरों को समय पर काम और मजदूरी दिलाने का है.
भुगतान व्यवस्था पर उठाए सवाल
हेमा देशमुख ने कहा कि मनरेगा में 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार को देनी होती है. वर्तमान हालात में राज्य सरकार के पास पर्याप्त संसाधन नहीं होने से भुगतान में दिक्कत आएगी. ऐसे में मजदूरों को उनकी मजदूरी के लिए भटकना पड़ेगा, जिससे वे काम करने से हतोत्साहित होंगे और योजना धीरे‑धीरे बंद होने की कगार पर पहुंच सकती है.
केंद्र से अधिक हिस्सेदारी की मांग
कांग्रेस ने मांग की कि मनरेगा का नाम बदला न जाए और केंद्र सरकार इस योजना में 90 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी निभाए. उनका कहना है कि इससे मजदूरों को समय पर भुगतान मिलेगा और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बने रहेंगे. कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा में किए गए बदलाव वापस नहीं लिए गए, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.