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This Article is From Dec 07, 2025

छत्तीसगढ़ में दशरथ मांझी प्रयास, सड़क बनाने के लिए दुर्गम पहाड़ी के चट्टानों से लोहा ले रहे ग्रामीण

Chhattisgarh Dashrath Manjhi: आजादी के 78 साल बाद भी मूलभूत सुविधाएं से दूर कोंडागांव जिले के नंदा गट्टा गांव के एक ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया, तो ग्रामीणों ने गांव में पक्की सड़क के लिए खुद फावड़ा उठा लिया और पहाड़ को भेदने चल पड़ा ताकि चट्टान का सीना चीर गांव के लिए एक पक्की सड़क बना सके.

छत्तीसगढ़ में दशरथ मांझी प्रयास, सड़क बनाने के लिए दुर्गम पहाड़ी के चट्टानों से लोहा ले रहे ग्रामीण
VILLAGERS CUTTING MOUNTAIN TO MAKE PAVED ROAD NANDA GUTTA VILLAGE, KONDAGAON, CG

Road Construction: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में हाथों में फावड़ा लिए ग्रामीण चट्टान तोड़कर गांव के लिए पक्की सड़क बनाने में जुटे हैं. सालों से एक पक्की सड़क की मांग कर रहे ग्रामीणों की सुनवाई नहीं हुई तो सब्र जवाब दे गया और ग्रामीणों ने खुद गांव में पक्की सड़क बनाने का फैसला किया और रास्ते के लिए पहाड़ का सीना चीरने निकल पड़ा है. 

आजादी के 78 साल बाद भी मूलभूत सुविधाएं से दूर कोंडागांव जिले के नंदा गट्टा गांव के एक ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया, तो ग्रामीणों ने गांव में पक्की सड़क के लिए खुद फावड़ा उठा लिया और पहाड़ी को भेदने चल पड़ा ताकि चट्टान का सीना चीर गांव के लिए एक पक्की सड़क बना सके.

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जीने के लिए दुर्गम पहाड़ी और कटीली झांडियां लांघते हैं ग्रामीण

मामला जिले केशकाल इलाके का दूरस्थ गाँव गांव नंदा गट्टा हैं, जहां आज भी पक्की सड़क, अस्पताल, स्कूल, राशन दुकान और आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं हैं. ग्रामीणों को सरकारी सुविधाओं के लिए दुर्गम पहाड़ी और कटीली झांडियों को लांघकर जाना पड़ता है. पक्की सड़क की मांग की आस टूटी तो जिंदगी आसान बनाने के लिए ग्रामीणों ने कठिन रास्ता तय किया है.

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दुर्गम पहाड़ी काटकर हाथों से बनाने निकले भविष्य का रास्ता 

रिपोर्ट के मुताबिक जिले के ग्रामीणों को कुयेमारी से नन्द गट्टा गांव जाने के लिए घने जंगल और दो पहाडियों को पार कर जाना पड़ता है. करीब 7 किलोमीटर का यह सफ़र ग्रामीणों को हर दिन पथरीले और उबड-खाबड़ रास्ते में पैदल चलकर ग्रामीणों को तय करना पड़ता है. ग्रामीण ने इसलिए दुर्गम पहाड़ी को काटकर गांव के लिए रास्ता बनाने का प्रण किया. 

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कुयेमारी से नन्द गट्टा गांव जाने के लिए ग्रामीणों को घने जंगल और दो पहाडियों को पार करना पड़ता है. 7 किमी लंबे का यह सफ़र पथरीले और उबड-खाबड़ रास्ते गुजरता है. लंबे इंतजार के बाद अब ग्रामीणों ने दुर्गम पहाड़ी को काटकर गांव के लिए एक पक्का रास्ता बनाने का प्रण किया. 
ग्रामीणों को 7 किलोमीटर लंबा सफर दुर्गम पहाड़ी पारकर तय करना पड़ता है

ग्रामीणों को 7 किलोमीटर लंबा सफर दुर्गम पहाड़ी पारकर तय करना पड़ता है

दुर्घम पहाड़ी पार कर नन्द गट्टा गांव पहुंची NDTV की टीम

गौरतलब है कोंडागांव जिले का नन्द गट्टा गांव विकास से कोसो दूर है,, लेकिन कोई भी सुध लेने वाला गांव नहीं पहुंचा है. यही कारण है कि गांव के लोगों को स्कूल, आंगनबाड़ी और अस्पताल के लिए दूसरे गांव की ओर रुख करना पड़ता है. गांव के लोगों का कहना है कि हर स्तर पर प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वाशन ही मिला है. 

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