North Bastar Naxal Free: छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर (कांकेर) में दशकों पुराने नक्सलवाद का अंत अब निकट दिखाई दे रहा है. केंद्र और राज्य सरकार द्वारा राज्य को पूरी तरह नक्सल मुक्त करने के लिए तय की गई मार्च 2026 की डेडलाइन में अब एक साल से भी कम का वक्त बचा है, लेकिन पुलिस और सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति ने इस लक्ष्य को समय से पहले ही हासिल करने की स्थिति पैदा कर दी है. पिछले महज तीन दिनों के भीतर 25 लाख रुपये के तीन इनामी नक्सलियों ने एके-47 जैसे हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि जंगलों में अब लाल आतंक का आधार पूरी तरह दरक चुका है.
बड़े कैडर्स के सरेंडर से टूटा नक्सलियों का नेटवर्क
बीते 72 घंटों में पुलिस को मिली सफलता किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है. आत्मसमर्पण करने वालों में दो डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) और एक सक्रिय पार्टी सदस्य शामिल हैं. इनके पास से एके-47 जैसे युद्ध स्तर के हथियार बरामद होना यह बताता है कि नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व में अब भारी हताशा है. पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) बस्तर, सुंदरराज पी और एसपी निखिल राखेचा की रणनीति ने नक्सलियों को दो रास्तों पर लाकर खड़ा कर दिया है - या तो वे गोली का सामना करें या मुख्यधारा में लौटकर नया जीवन शुरू करें.
अब केवल 21 शेष: 60 लाख का इनाम और अंतिम प्रहार
कांकेर पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा के अनुसार, उत्तर बस्तर के जंगलों में अब केवल 21 सक्रिय नक्सली ही बचे हैं. इन बचे हुए नक्सलियों पर कुल मिलाकर करीब 60 लाख रुपये का इनाम घोषित है. एसपी ने स्पष्ट किया है कि बड़े कैडर्स के सरेंडर के बाद अब इन 21 नक्सलियों के पास न तो कोई बड़ा नेता बचा है और न ही कोई वैचारिक आधार. पुलिस का अनुमान है कि जिस तेजी से आत्मसमर्पण का सिलसिला शुरू हुआ है, उसे देखते हुए ये शेष नक्सली भी जल्द ही हथियार डाल देंगे, जिससे उत्तर बस्तर पूरी तरह 'गन-फ्री जोन' बन जाएगा.
विकास की राह और पुलिस की विशेष हेल्पलाइन
बता दें कि नक्सलवाद के कारण उत्तर बस्तर के अंदरूनी इलाके दशकों से बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, अस्पताल और स्कूल से महरूम रहे हैं. इस बाधा को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए पुलिस ने एक मानवीय पहल भी की है. शेष बचे 21 नक्सलियों को सुरक्षित वापसी का मौका देने के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर 9479194119 जारी किया गया है. इस नंबर का मकसद उन नक्सलियों तक पहुंचना है जो मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं लेकिन किसी डर के कारण नहीं आ पा रहे हैं. पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि बिना किसी भय के संपर्क करने वालों को सरकार की पुनर्वास नीति का पूरा लाभ दिया जाएगा. मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य और जंगलों में सुरक्षा बलों की बढ़ती पैठ को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उत्तर बस्तर कांकेर जिला सरकार की निर्धारित डेडलाइन से काफी पहले ही नक्सल मुक्त हो जाएगा. यह न केवल सुरक्षा बलों की रणनीतिक जीत होगी, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों के लिए भी एक नई सुबह होगी जो दशकों से दहशत के साये में जी रहे हैं. आने वाले कुछ हफ्तों में होने वाले संभावित आत्मसमर्पण इस दावे को और पुख्ता करेंगे कि बस्तर में अब बदलाव की बयार बह रही है.
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