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धान खरीद बंद: सत्यापन के बाद भी नहीं बिक पाया 6000 क्विंटल Dhan, बिलासपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों किसान, धरने की दी चेतावनी

Chhattisgarh Dhan Kharidi: बिलासपुर किसानों का कहना है कि पूरे जिले में सैकड़ों किसान ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं, जिनका धान अब भी घरों और खलिहानों में रखा हुआ है. इधर, महासमुंद के पिथौरा विकास खण्ड के प्राथमिक कृषि साख समिति राजाडेरा में लगभग 100 से ज्यादा किसानों का लगभग 6 हजार क्विंटल धान सत्यापन के बाद भी नहीं बिक पाया है.

धान खरीद बंद: सत्यापन के बाद भी नहीं बिक पाया 6000 क्विंटल Dhan, बिलासपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों किसान, धरने की दी चेतावनी

Chhattisgarh Dhan Kharidi Process Closed: छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है. राज्य सरकार ने धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 तय की थी, जिसके बाद सभी धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी बंद कर दी गई. हालांकि खरीदी बंद होने के बावजूद कई किसान अब भी अपना धान नहीं बेच पाए हैं, जिससे प्रदेश के किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. किसान लगातार सरकार से धान खरीदी की तारीख बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.

बिलासपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों किसान

धान खरीदी जारी रखने की मांग को लेकर बिलासपुर जिले के किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया. किसानों का आरोप है कि उन्होंने समय पर आवेदन किया. भौतिक सत्यापन भी पूरा हुआ, इसके बावजूद धान उपार्जन केंद्रों ने उनका धान नहीं उठाया, जिससे वे धान बेचने से वंचित रह गए.

बड़ी संख्या में किसान नहीं बेच पाए धान 

किसानों का कहना है कि पूरे जिले में सैकड़ों किसान ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं, जिनका धान अब भी घरों और खलिहानों में रखा हुआ है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिलासपुर जिले में अब तक 6,75,480.92 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसान खरीदी से बाहर रह गए, जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

धान खरीदी की तारीख बढ़ाने की मांग

किसानों ने साफ कहा है कि यदि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया और धान खरीदी की तारीख नहीं बढ़ाई गई, तो वो कलेक्टर कार्यालय के सामने धरने पर बैठने को मजबूर होंगे.फिलहाल प्रशासन की ओर से किसानों को आश्वासन दिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन किसान ठोस निर्णय का इंतजार कर रहे हैं.

सत्यापन के बाद भी नहीं बिका 6 हजार क्विंटल धान

इधर, महासमुंद जिले में भी धान खरीदी नहीं होने से किसान मायूस हैं और वो सरकार से लगातार तारीख बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. बता दें कि जिन किसानों का धान नहीं बिक पाया, वो काफी आक्रोशित है और अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है. ताजा मामला जिले के पिथौरा विकास खण्ड के प्राथमिक कृषि साख समिति राजाडेरा का है, जहां लगभग 100 से ज्यादा किसानों का लगभग 6 हजार क्विंटल धान सत्यापन के बाद भी नहीं बिक पाया है. इस समिति के 50 किसान ऐसे है जिनका एक बार भी टोकन नहीं कटा है और 70 किसान ऐसे है जिनका एक बार टोकन कटा था.

धरने पर बैठ इन गांवों के किसान

खून-पसीने से उगाया धान नहीं बिक पाने से किसान परेशान हैं. वहीं ग्राम राजाड़ेरा, जम्हर, खुशरूपाली, गोड़बाहल, कोकोभाठा, छिबर्रा, कोचर्रा, अरण्ड, टेका, सोनासिल्ली, खुटेरी, कौहाकुड़ा, बरेकेल, पिथौरा सुखीपाली, बगारपाली के किसान आज अपने-अपने धान को ट्रैक्टर पर लादकर पिथौरा तहसील पहुंचे और धरने पर बैठ गए.

तेन्दूकोना में किसानों ने किया चक्काजाम

किसानों का कहना है कि जब तक धान नहीं बिकेगा हम लोग यहां बैठे रहेंगे. वहीं एसडीएम का कहना है कि ये शासन स्तर का मामला है. किसानों के आवेदन को प्रशासन शासन तक पहुंचाया जाएगा. बता दें कि तेन्दूकोना के किसान भी धान नहीं बिकने से आक्रोशित होकर तेन्दूकोना में चक्काजाम किया.

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