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छत्तीसगढ़ के सबसे ज्यादा संवेदनशील गांव को मिला पानी, नक्सल के अंत के साथ पहुंच रहा विकास

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के नेलांगुर गांव में अब हर घर में नल से पानी पहुंच गया है. पहले यहां पानी की कमी एक बड़ी समस्या थी, लेकिन जल जीवन मिशन के तहत जल आपूर्ति प्रणाली स्थापित की गई है.

छत्तीसगढ़ के सबसे ज्यादा संवेदनशील गांव को मिला पानी, नक्सल के अंत के साथ पहुंच रहा विकास
'अति संवेदनशील' गांव में पहुंचा पानी.

Naxal Free Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ से नक्सली खतरे का अंत हो गया है और राज्य के नारायणपुर जिले के दूरस्थ गांव नेलांगुर को ‘‘अति संवेदनशील'' क्षेत्र के रूप में जाना जाता था. यहां लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह होती थी कि अगर प्यास लगे तो पानी कैसे पीएंगे, जिससे प्यास बुझाई जा सके.  अब गांव की जल आपूर्ति की कमी की समस्या भी दूर हो गई है. अधिकारियों ने रविवार को बताया कि पहली बार गांव के हर घर में नल से पानी का कनेक्शन पहुंच गया है, जो अब चालू भी हो गया है.

इस पहल से जीवन के लिए अनमोल पानी की कमी की समस्या के समाप्त होने के साथ ही लंबे समय से इसके लिए जारी संघर्ष का भी अंत हो गया है. यह पहल ऐसे समय में की गई है, जब छत्तीसगढ़ को 31 मार्च को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित किए जाने के बाद कुछ ही दिन बीते हैं.

लंबे समय से नक्सल से प्रभावित था यह इलाका

छत्तीसगढ़ और खासकर बस्तर क्षेत्र चार दशकों से अधिक समय से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से जूझ रहा था. नारायणपुर, बस्तर क्षेत्र के सात जिलों में से एक है. एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र सीमा के समीप स्थित दुर्गम ओरछा ब्लॉक में बसा नेलांगुर कभी एक अति संवेदनशील क्षेत्र के रूप में जाना जाता था. कठिन भूभाग और पहले की सुरक्षा चिंताओं के कारण राज्य प्रशासन के लिए यहां बुनियादी सेवाओं की आपूर्ति एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई थी.''

कलेक्टर ने क्या कहा

नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन (Narayanpur Collector Namrata Jain) ने कहा कि नल के पानी की उपलब्धता राज्य के सबसे दूरस्थ कोनों को विकास की मुख्यधारा में लाने के मकसद से किए जा रहे निरंतर प्रशासनिक प्रयासों को दर्शाती है. उन्होंने बताया, “जल जीवन मिशन के तहत जल आपूर्ति प्रणाली स्थापित की गई. सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले पंपों का उपयोग करके जलस्रोत से पानी प्राप्त किया जा रहा है और पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचाया जा रहा है. इससे बिजली ग्रिड पर निर्भरता कम करते हुए पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हुई है.”

जिले से 52 किमी दूर था गांव

उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय से 52 किलोमीटर दूर स्थित नेलांगुर के निवासियों के लिए यह परियोजना जीवन को बदल देने वाली साबित हुई है. पानी लाने को पहले लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर रहने वाली महिलाओं ने कहा घर पर जलापूर्ति होने से उनकी दिनचर्या आसान हो गई और स्वच्छता के स्तर में सुधार हुआ है.

सुरक्षाबलों के अभियान से खत्म हुआ नक्सल

अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल अप्रैल में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और राज्य पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से गांव में एक सुरक्षा शिविर स्थापित किए जाने के बाद क्षेत्र में विकास की गति में काफी तेजी आई. सरकार ने 31 मार्च को छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद मुक्त घोषित कर दिया. सुरक्षा बलों ने घने जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाकर उन्हें कमजोर कर दिया, जिससे अधिकतर नक्सली नेता और कार्यकर्ता निष्क्रिय हो गए या उन्होंने हथियार डाल दिए थे.

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