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This Article is From Apr 02, 2026

Jaggi murder Case:  हाईकोर्ट के फैसले पर अमित जोगी के सवाल, कहा- बिना सुनवाई के 40 मिनट में CBI की अपील हो गई स्वीकार

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए  लिखा कि हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया, जबकि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर तक नहीं दिया गया. उन्होंने लिखा कि यह बेहद अप्रत्याशित है कि जिस व्यक्ति को पहले अदालत ने दोषमुक्त कर दिया था, उसे बिना सुनवाई के दोषी ठहराया गया.

जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, लिखा-बिना सुनवाई के हाईकोर्ट ने CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया
Zulfikar Ali

छत्तीसगढ़ के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद सियासी और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है. कोर्ट ने इस मामले में अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है. वहीं, इस फैसले पर अमित जोगी ने गंभीर सवाल उठाते हुए न्याय प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है.

अमित जोगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए  लिखा कि हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया, जबकि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर तक नहीं दिया गया. उन्होंने लिखा कि यह बेहद अप्रत्याशित है कि जिस व्यक्ति को पहले अदालत ने दोषमुक्त कर दिया था, उसे बिना सुनवाई के दोषी ठहराया गया. उन्होंने आगे कहा कि उन्हें अदालत के आदेश के अनुसार तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करना है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिलेगा. जोगी ने कहा कि वे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा रखते हैं और धैर्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने अंत में कहा कि सत्य की जीत अवश्य होगी.

हाईकोर्ट ने दिया सरेंडर का आदेश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है. इस फैसले को अमित जोगी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने करीब 11 हजार पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की थी. इस रिपोर्ट में अमित जोगी के खिलाफ भी आरोप लगाए गए थे. हालांकि, निचली अदालत ने पहले इस मामले में उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन बाद में इस केस को फिर से खोला गया और सुनवाई आगे बढ़ी.

2003 में हुई थी हत्या

राम अवतार जग्गी हत्याकांड 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था. इनमें से बिट्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी. अमित जोगी को उस समय बरी कर दिया गया था, लेकिन इस फैसले के खिलाफ रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को भेज दिया, जहां अब नया फैसला सामने आया है.

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अब इस पूरे मामले में अगला कदम सुप्रीम कोर्ट में उठाया जा सकता है. अमित जोगी ने भी संकेत दिए हैं कि वे उच्चतम न्यायालय का रुख करेंगे. ऐसे में आने वाले समय में इस केस की दिशा और इसके राजनीतिक असर पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी.

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