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This Article is From Apr 14, 2026

इमली के पेड़ तले बाबा साहब को नमन; बैगा समाज ने सादगी में मनाई अंबेडकर जयंती

अंबेडकर जयंती के अवसर पर जहां देशभर में भव्य राजनीतिक कार्यक्रम हुए, वहीं NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में बैगा समाज की सादगी भरी तस्वीर सामने आई. दूरस्थ गांव चुक्तीपानी में बैगा समुदाय ने इमली के पेड़ तले बाबा साहब को पारंपरिक तरीके से याद किया.

इमली के पेड़ तले बाबा साहब को नमन; बैगा समाज ने सादगी में मनाई अंबेडकर जयंती

Ambedkar Jayanti 2026: देशभर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर बड़े‑बड़े मंच, राजनीतिक भाषण और भव्य कार्यक्रम नजर आए, लेकिन इसी बीच एक दूरस्थ गांव से आई तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा. NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में जिले के सीमांत गांव चुक्तीपानी के बाजार दाढ़ में बैगा समाज ने बाबा साहब को बेहद सादगी और अपने पारंपरिक अंदाज में याद किया. यह आयोजन कम शब्दों में कही गई बड़ी बात जैसा था, जहां दिखावे से दूर, सच्ची श्रद्धा नजर आई.

वनांचल में सादगी भरा आयोजन

वन अधिकार कानून से मान्यता प्राप्त इस इलाके में रहने वाला बैगा समुदाय आज भी प्रकृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा है. अंबेडकर जयंती के अवसर पर समुदाय के लोग इमली के पेड़ की छांव में एकत्र हुए. न कोई मंच था, न माइक और न ही कोई औपचारिक कार्यक्रम. फिर भी पूरे माहौल में सम्मान और आस्था साफ झलकती रही.

परंपराओं के साथ बाबा साहब को स्मरण

नागा बैगा और नागा बैगिन की पूजा करने वाले इस समुदाय ने अपने रीति‑रिवाजों के साथ बाबा साहब को याद किया. हर चेहरे पर गंभीरता और श्रद्धा थी. लोगों ने सादगी के साथ यह दिखाया कि सम्मान जताने के लिए आडंबर जरूरी नहीं होता.

संविधान ने दिया अंतिम व्यक्ति को हक

बैगा समाज के लोगों का कहना है कि बाबा साहब ने संविधान के जरिए समाज के सबसे कमजोर और आखिरी व्यक्ति को भी अधिकार और सम्मान दिया. यही वजह है कि आज उनके विचार दूर‑दराज के जंगलों और गांवों तक पहुंचे हैं. यह आयोजन इसी सोच का जीवंत उदाहरण बन गया.

इस मौके पर बैगा समाज में आ रहे बदलाव भी साफ नजर आए. कभी अशिक्षा और बेरोजगारी से जूझने वाला यह समुदाय अब धीरे‑धीरे शिक्षा की ओर बढ़ रहा है. खासकर बेटियों की शिक्षा और भागीदारी बढ़ना इस परिवर्तन की सबसे मजबूत पहचान बन रही है.

अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता

‘राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र' कहे जाने वाले बैगा समाज में अब अपने अधिकारों और पहचान को लेकर जागरूकता बढ़ रही है. संविधान से मिले अधिकारों ने उन्हें यह भरोसा दिया है कि वे भी समाज की मुख्यधारा से जुड़े हैं और अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं.

राजनीति से दूर, भावनाओं के करीब

NDTV की इस ग्राउंड रिपोर्ट ने यह भी दिखाया कि जहां कई जगह अंबेडकर जयंती को राजनीतिक नजरिये से देखा गया, वहीं बैगा समाज ने इसे पूरी सादगी और भावना के साथ मनाकर अलग मिसाल पेश की. यह आयोजन एक साफ संदेश देता है कि सच्चा सम्मान न मंचों में छिपा होता है, न भाषणों में. वह भावनाओं, परंपराओं और जमीन से जुड़े लोगों के सरल व्यवहार में दिखाई देता है- जैसा कि इमली के पेड़ तले बाबा साहब को नमन करते बैगा समाज में नजर आया.

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