‘पंडुम’ शब्द का अर्थ ही उत्सव होता है और वास्तव में यह आयोजन बस्तर की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक जीवन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही जनजातीय विरासत के संरक्षण और संवर्धन का सशक्त माध्यम बन चुका है।