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Dr Br Ambedkar

'Dr Br Ambedkar' - 6 News Result(s)
  • 26 जनवरी: संविधान सभा की बेहद खास बहसों को याद करने का दिन

    26 जनवरी: संविधान सभा की बेहद खास बहसों को याद करने का दिन

    76th Republic Day: 26 जनवरी संविधान सभा की उन बहसों को भी याद करने का दिन है जिनमें तीन वर्षों तक लगातार सभा के विद्वान सदस्यों ने देश का सर्वोच्च विधान तैयार करने के लिए छोटे-छोटे बिंदुओं पर लंबी श्रमसाध्य बहसें कीं ताकि भारत को एक समृद्ध, संप्रभु, न्याय और विवेकसम्मत राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ने की दिशा में मिल सके.

  • महापरिनिर्वाण दिवस: डॉ बीआर अम्बेडकर और संविधान

    महापरिनिर्वाण दिवस: डॉ बीआर अम्बेडकर और संविधान

    Mahaparinirvan Diwas 2024: आज डॉ बीआर अम्बेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है. समाज का एक बड़ा तबका उन्हें भारतीय संविधान का निर्माता मानता है. वहीं एक और बात बहुत प्रचलित है कि भारतीय संविधान विदेशी संविधानों की नकल है. ऐसा कहने वाले संविधान निर्माण में अम्बेडकर की भूमिका को कम करके दर्शाना चाहते हैं. ऐसे भ्रमों को स्वयं अम्बेडकर ने दूर किया है. आइए जानते हैं संविधान निर्माण में उनकी भूमिका और इससे जुड़ी उनकी चिंताओं के बारे में.

  • Mahaparinirvan Diwas 2024: संविधान निर्माता की पुण्यतिथि, जानिए बाबा साहेब के विचार, इन्होंने दी श्रद्धांजलि

    Mahaparinirvan Diwas 2024: संविधान निर्माता की पुण्यतिथि, जानिए बाबा साहेब के विचार, इन्होंने दी श्रद्धांजलि

    Mahaparinirvan Diwas 2024: डॉ अंबेडकर एक समाज सुधारक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, लेखक, बहुभाषाविद, मुखर वक्ता, विद्वान और धर्मों के विचारक थे. उनका जन्म वर्ष 1891 में महू, मध्य प्रांत (अब मध्य प्रदेश) में हुआ था. वह संविधान निर्माण की मसौदा समिति के अध्यक्ष थे. उन्हें ‘भारतीय संविधान का जनक’ माना जाता है और वह भारत के पहले कानून मंत्री थे. 6 दिसंबर, 1956 को उनका निधन हो गया था. चैत्य भूमि मुंबई में स्थित भीमराव अंबेडकर का स्मारक है.

  • संविधान सभा में बोले गए थे 36 लाख शब्द, क्या है भारतीय संविधान? जानिए इसका सफर

    संविधान सभा में बोले गए थे 36 लाख शब्द, क्या है भारतीय संविधान? जानिए इसका सफर

    Constitution Day Of India 2024: संविधान सभा की कार्यवाही पर कुल व्यय और उसके दर्शक 26 नवम्बर 1949 को, जिस दिन संविधान सभा में संविधान को अंगीकार किया गया, उस दिन डाॅ राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान सभा को बताया कि लगभग तीन साल तक चली संविधान सभा की प्रक्रिया पर कुल 63,96,721 रुपये का व्यय आया. जब संविधान बन रहा था, तब लगभग 53 हज़ार लोगों ने दर्शक दीर्घा से उस प्रक्रिया को देखा. हाथ से लिखे गये इस दस्तावेज में कहीं भी कोई गलती नहीं है, यहां तक कि स्याही का कोई अतिरिक्त बिंदु भी नहीं गिरा दिखाई देगा.

  • संविधान दिवस : मनसा वाचा कर्मणा में हों संवैधानिक मूल्य

    संविधान दिवस : मनसा वाचा कर्मणा में हों संवैधानिक मूल्य

    संवैधानिक मूल्य हमें सही और ग़लत में फर्क करना सिखाते हैं. संवैधानिक मूल्य की जिम्मेदारी और पालन देखें, तब समझ आता है कि, यह हमारी नैतिकता पर निर्भर करता है. कई बार हमारा आचरण, व्यवहार और कार्य में संवैधानिक मूल्यों का पालन‌ नजर नहीं आता, जिससे संवैधानिक मूल्यों को क्षति पहुंचती है.

  • भारत के बाहर डॉ. भीमराव अंबेडकर की सबसे बड़ी प्रतिमा, 14 अक्टूबर को US में होगा अनावरण

    भारत के बाहर डॉ. भीमराव अंबेडकर की सबसे बड़ी प्रतिमा, 14 अक्टूबर को US में होगा अनावरण

    6 दिसंबर, 1956 को डॉ. भीमराव अंबेडकर की मृत्यु हो गई थी. इस दिन को उनके अनुयायी 'धम्म चक्र परिवर्तन दिवस' के रूप में मनाते हैं. मैरीलैंड में प्रतिमा के अनावरण के लिए भी इसी तारीख को चुना गया है.

'Dr Br Ambedkar' - 6 News Result(s)
  • 26 जनवरी: संविधान सभा की बेहद खास बहसों को याद करने का दिन

    26 जनवरी: संविधान सभा की बेहद खास बहसों को याद करने का दिन

    76th Republic Day: 26 जनवरी संविधान सभा की उन बहसों को भी याद करने का दिन है जिनमें तीन वर्षों तक लगातार सभा के विद्वान सदस्यों ने देश का सर्वोच्च विधान तैयार करने के लिए छोटे-छोटे बिंदुओं पर लंबी श्रमसाध्य बहसें कीं ताकि भारत को एक समृद्ध, संप्रभु, न्याय और विवेकसम्मत राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ने की दिशा में मिल सके.

  • महापरिनिर्वाण दिवस: डॉ बीआर अम्बेडकर और संविधान

    महापरिनिर्वाण दिवस: डॉ बीआर अम्बेडकर और संविधान

    Mahaparinirvan Diwas 2024: आज डॉ बीआर अम्बेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है. समाज का एक बड़ा तबका उन्हें भारतीय संविधान का निर्माता मानता है. वहीं एक और बात बहुत प्रचलित है कि भारतीय संविधान विदेशी संविधानों की नकल है. ऐसा कहने वाले संविधान निर्माण में अम्बेडकर की भूमिका को कम करके दर्शाना चाहते हैं. ऐसे भ्रमों को स्वयं अम्बेडकर ने दूर किया है. आइए जानते हैं संविधान निर्माण में उनकी भूमिका और इससे जुड़ी उनकी चिंताओं के बारे में.

  • Mahaparinirvan Diwas 2024: संविधान निर्माता की पुण्यतिथि, जानिए बाबा साहेब के विचार, इन्होंने दी श्रद्धांजलि

    Mahaparinirvan Diwas 2024: संविधान निर्माता की पुण्यतिथि, जानिए बाबा साहेब के विचार, इन्होंने दी श्रद्धांजलि

    Mahaparinirvan Diwas 2024: डॉ अंबेडकर एक समाज सुधारक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, लेखक, बहुभाषाविद, मुखर वक्ता, विद्वान और धर्मों के विचारक थे. उनका जन्म वर्ष 1891 में महू, मध्य प्रांत (अब मध्य प्रदेश) में हुआ था. वह संविधान निर्माण की मसौदा समिति के अध्यक्ष थे. उन्हें ‘भारतीय संविधान का जनक’ माना जाता है और वह भारत के पहले कानून मंत्री थे. 6 दिसंबर, 1956 को उनका निधन हो गया था. चैत्य भूमि मुंबई में स्थित भीमराव अंबेडकर का स्मारक है.

  • संविधान सभा में बोले गए थे 36 लाख शब्द, क्या है भारतीय संविधान? जानिए इसका सफर

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    Constitution Day Of India 2024: संविधान सभा की कार्यवाही पर कुल व्यय और उसके दर्शक 26 नवम्बर 1949 को, जिस दिन संविधान सभा में संविधान को अंगीकार किया गया, उस दिन डाॅ राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान सभा को बताया कि लगभग तीन साल तक चली संविधान सभा की प्रक्रिया पर कुल 63,96,721 रुपये का व्यय आया. जब संविधान बन रहा था, तब लगभग 53 हज़ार लोगों ने दर्शक दीर्घा से उस प्रक्रिया को देखा. हाथ से लिखे गये इस दस्तावेज में कहीं भी कोई गलती नहीं है, यहां तक कि स्याही का कोई अतिरिक्त बिंदु भी नहीं गिरा दिखाई देगा.

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    संविधान दिवस : मनसा वाचा कर्मणा में हों संवैधानिक मूल्य

    संवैधानिक मूल्य हमें सही और ग़लत में फर्क करना सिखाते हैं. संवैधानिक मूल्य की जिम्मेदारी और पालन देखें, तब समझ आता है कि, यह हमारी नैतिकता पर निर्भर करता है. कई बार हमारा आचरण, व्यवहार और कार्य में संवैधानिक मूल्यों का पालन‌ नजर नहीं आता, जिससे संवैधानिक मूल्यों को क्षति पहुंचती है.

  • भारत के बाहर डॉ. भीमराव अंबेडकर की सबसे बड़ी प्रतिमा, 14 अक्टूबर को US में होगा अनावरण

    भारत के बाहर डॉ. भीमराव अंबेडकर की सबसे बड़ी प्रतिमा, 14 अक्टूबर को US में होगा अनावरण

    6 दिसंबर, 1956 को डॉ. भीमराव अंबेडकर की मृत्यु हो गई थी. इस दिन को उनके अनुयायी 'धम्म चक्र परिवर्तन दिवस' के रूप में मनाते हैं. मैरीलैंड में प्रतिमा के अनावरण के लिए भी इसी तारीख को चुना गया है.

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