Mahakal Temple VIP Entry Controversy:उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकाल मंदिर के गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश को लेकर विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है.इंदौर निवासी हाईकोर्ट एडवोकेट चर्चित शास्त्री की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा. इस याचिका में मांग की गई है कि महाकाल मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी और आम आदमी के बीच भेदभाव खत्म कर सभी के लिए समान व्यवस्था लागू की जाए.
भेदभाव के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती
वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दायर इस याचिका में मुख्य रूप से मंदिर प्रशासन की दोहरी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता का तर्क है कि जहां प्रभावशाली और वीआईपी लोग आसानी से गर्भगृह में प्रवेश कर बाबा महाकाल का पूजन कर लेते हैं, वहीं आम श्रद्धालुओं को केवल बाहर से दर्शन करने पड़ते हैं. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्या बागची की डबल बेंच इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को इस पर विचार करेगी.
हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद उठाया कदम
इससे पहले यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी ले जाया गया था.हालांकि,वहां 28 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इसे 'व्यक्तिगत आहत' का मामला बताते हुए और मंदिर की व्यवस्था तय करने का अधिकार जिला कलेक्टर पर छोड़ते हुए याचिका खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट के इसी फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसमें युगों से चली आ रही जल अर्पण की परंपरा का हवाला दिया गया है.
सांसद की मांग और मुख्यमंत्री की सलाह
गर्भगृह में प्रवेश का मुद्दा केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय रहा है.उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया लंबे समय से आम भक्तों के लिए गर्भगृह खोलने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने इस संबंध में कलेक्टर से चर्चा की और मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के सामने भी सार्वजनिक मंच से यह मांग रखी थी. हालांकि, मुख्यमंत्री ने उस समय श्रद्धालुओं को विकल्प के तौर पर जूना महाकाल में पूजा करने की सलाह दी थी.
क्यों और कब लगा था प्रवेश पर प्रतिबंध?
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में आम भक्तों का प्रवेश 4 जुलाई 2023 को सावन के महीने में बढ़ती भीड़ को देखते हुए अस्थाई रूप से बंद किया गया था. मंदिर समिति ने तब दावा किया था कि सावन खत्म होने के बाद यह व्यवस्था फिर से बहाल कर दी जाएगी. लेकिन करीब ढाई साल बीत जाने के बाद भी आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह के दरवाजे नहीं खुले,जबकि वीआईपी प्रवेश निरंतर जारी रहा.
बढ़ती भीड़ और शिवलिंग क्षरण की चुनौती
मंदिर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं की भारी संख्या है. महाकाल लोक बनने के बाद भक्तों की संख्या में चार गुना वृद्धि हुई है, जो अब रोजाना डेढ़ से दो लाख तक पहुंच गई है. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्देशों के अनुसार शिवलिंग क्षरण को रोकने के लिए भी गर्भगृह में लोगों की संख्या सीमित रखना अनिवार्य है. प्रशासन का तर्क है कि इतनी बड़ी संख्या में सभी को गर्भगृह में प्रवेश देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है.
स्पर्श दर्शन की आस में श्रद्धालु
वर्तमान में अधिकांश श्रद्धालु गणेश मंडपम और नंदी हॉल से ही दर्शन कर पा रहे हैं. मंदिर के पुजारियों का भी मानना है कि भक्तों के मन में बाबा महाकाल को स्पर्श करने और अभिषेक करने की इच्छा रहती है. 2023 से पहले 1500 रुपये की रसीद पर अभिषेक की अनुमति थी,जो अब भी बंद कर दिया गया है. अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या आम आदमी को भी गर्भगृह में प्रवेश का अधिकार मिल पाएगा?
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