Shiv Parvati Vivah Mahakal Ujjain: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर (Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Mandir Ujjain) में महाशिवरात्रि पर्व के सम्पन्न होते ही शिव-पार्वती विवाह उत्सव की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं. परंपरा के तहत उज्जैन में इस बार भी ‘शयन आरती परिवार' ने बाबा महाकाल (Baba Mahakal) की बारात (Shiv Barat) से लेकर नगर भोज (Nagar Bhoj) तक के आयोजन की घोषणाएं कर दी हैं. शहर में विवाह की पत्रिकाएं बांटी जा रही हैं, जिनमें भूत‑प्रेतों तक को निमंत्रण भेजने की पुरातन परंपरा का पालन किया गया है. इस अनूठे निमंत्रण के कारण आयोजन एक बार फिर चर्चा में है.
Shiv Parvati Vivah: उज्जैन में शिव-पार्वती विवाह की पत्रिका
26 फरवरी को निकलेगी बारात, रिसेप्शन तक का पूरा कार्यक्रम पत्रिका में दर्ज
शयन आरती परिवार पिछले 26 वर्षों से महाशिवरात्रि के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह उत्सव आयोजित करता आ रहा है. इस वर्ष भी 26 फरवरी को बारात और नगर भोज आयोजित किया जाएगा. इसके लिए प्रकाशित पत्रिका में हल्दी‑मेहंदी से लेकर शुभ लग्न और रिसेप्शन तक का पूरा शेड्यूल दर्ज है. परंपरा के मुताबिक पहली पत्रिका भगवान गणेश के मंदिर में चढ़ाई गई, उसके बाद महाकाल और उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों में आमंत्रण भेजा गया. आयोजन समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, हर वर्ष की तरह इस बार भी दिव्य निमंत्रण में आम नागरिकों के साथ‑साथ दिव्य शक्तियों को भी आमंत्रित किया गया है.
Shiv Parvati Vivah: उज्जैन में शिव-पार्वती विवाह का निमंत्रण
पत्रिका में दर्ज विवाह कार्यक्रम
विवाह पत्रिका के कवर पर लिखा है- “बाबा महाकाल संग माता पार्वती विवाह एवं रिसेप्शन – 26 फरवरी 2026, स्थान: कुमावत मारवाड़ी धर्मशाला, नृसिंह घाट के सामने, उज्जैन, समय: शाम 4 बजे से.”
दूसरे पेज पर पूरा शेड्यूल-
- गणपति पूजन: 25 फरवरी, सुबह 10 बजे
- हल्दी‑मेहंदी: 25 फरवरी, शाम 4 बजे
- शुभ लग्न: 26 फरवरी, शाम 5 बजे
आमंत्रण में गणेश, कार्तिकेय, अशोक सुंदरी, नंदी महाराज, वीरभद्र, मणिभद्र सहित तैंतीस कोटि देवताओं और पूरे अवंतिका वासियों का भी उल्लेख किया गया है.
श्मशान में भी रखी गई विवाह पत्रिका-आएंगे ‘खास मेहमान'
कार्यक्रम की सबसे विशेष परंपरा है-श्मशान में निमंत्रण भेजना. शयन आरती परिवार के राजेश शर्मा ने बताया कि महाकाल को “श्मशान वासी” कहा जाता है, इसलिए चक्रतीर्थ श्मशान में भी विवाह पत्रिका रखी गई है, ताकि वहाँ के भूत‑पिशाच और अन्य अदृश्य गण बारात में शामिल हो सकें. यही कारण है कि पत्रिका में साफ लिखा है कि रात्रि 12 बजे डाकिनी, शाकिनी, भूत‑पिशाच का विशेष नृत्य होगा और बारात में भूत, प्रेत और चुड़ैल का अनोखा नृत्य आकर्षण रहेगा. हालांकि यह प्रदर्शन कलाकारों द्वारा स्वांग रूप में किया जाता है, जो हर वर्ष भक्तों के बीच उत्साह का केंद्र रहता है.
नगर भोज में होंगे 56 प्रकार के व्यंजन, 100 हलवाई जुटेंगे सेवा में
विवाह उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण नगर भोज होता है. इस वर्ष करीब 100 हलवाई भोज की तैयारी में जुटेंगे. भक्तों के लिए कई पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाएंगे. भोज की शुरुआत भगवान को 56 भोग अर्पित कर की जाएगी, जो महाकाल परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. जैसे :
- पूरी‑सब्जी
- दाल‑चावल
- पुलाव
- पापड़‑भजिए
- हलवा
- खोपरा पाक
- नुगती
- पानी पताशी
- शिकंजी, गन्ने का रस
- पान और नमकीन
उज्जैन में उत्सव की रौनक-भक्तों में उत्साह
इतिहास और आध्यात्मिक उत्साह से भरे इस आयोजन को देखने हर वर्ष हजारों भक्त उज्जैन पहुँचते हैं. आयोजन समिति का मानना है कि इस सांस्कृतिक परंपरा का उद्देश्य भक्तों को शिव‑पार्वती विवाह की पौराणिक कथा से जोड़ना और महाकाल की दिव्य लीला का अनुभव कराना है.
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