ट्विशा शर्मा की रहस्यमयी मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. इस हाई प्रोफाइल केस की शुरुआती कड़ियों को जोड़ने में भोपाल की कटारा हिल्स थाना पुलिस की कार्यप्रणाली भले ही शुरू से ही सवालों और चर्चाओं के घेरे में रही हो, लेकिन इसी महकमे के एक जिम्मेदार जवान ने अपनी सूझबूझ से पूरी जांच का रुख ही बदल दिया. दरअसल, कटारा हिल्स थाने में तैनात कांस्टेबल राघवेंद्र सिंह पटेल का बनाया एक वीडियो अब इस पूरे मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के लिए जांच की सबसे मजबूत बुनियाद बन चुका है.
इस मामले की कमान संभालते ही सीबीआई की टीम ने जब केस डायरी और स्थानीय स्तर पर हुई शुरुआती छानबीन का बारीकी से अध्ययन किया, तो उन्होंने कटारा हिल्स थाना पुलिस से लेकर विशेष जांच दल (SIT) के अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरा असंतोष और नाराजगी जताई थी. जांच में कई तरह की खामियां और लापरवाही खुलकर सामने आई थीं, लेकिन इन तमाम कमियों के बीच, आरक्षक राघवेंद्र सिंह पटेल की सतर्कता ने जांच एजेंसी को एक ऐसा पुख्ता आधार और वैज्ञानिक साक्ष्य दे दिया, जिसकी अनदेखी करना नामुमकिन था.
दरवाजा खुलते ही की मिनट-दर-मिनट की रिकॉर्डिंग
यह कहानी उस खौफनाक रात की है जब 12 मई को ट्विशा शर्मा की मौत के बाद आरोपी गिरिबाला और समर्थ उसके शव को वहीं छोड़कर वापस लौट आए थे. इसके बाद एम्स (AIIMS) अस्पताल प्रबंधन ने कटारा हिल्स थाने को मामले की सूचना (मर्ग) दी. सूचना मिलते ही रात के करीब दो बजे कांस्टेबल राघवेंद्र सिंह पूरी पुलिस टीम के साथ मौका ए वारदात पर पहुंचे. जैसे ही बंद पड़े घर का ताला खोला गया, राघवेंद्र ने बिना वक्त गंवाए अपने मोबाइल कैमरे से पूरे घर की वीडियोग्राफी शुरू कर दी. उन्होंने सिर्फ कमरे को ही नहीं, बल्कि घटनास्थल की एक-एक बारीकी को कैमरे में कैद किया.
सीबीआई के लिए क्यों अहम है यह वीडियो?
राघवेंद्र ने कमरे में बिखरे सामान, वहां मौजूद बेल्ट और परिस्थितियों का बेहद बारीकी से निरीक्षण करते हुए वीडियो बनाया. इतना ही नहीं, जब पुलिस टीम ने अपनी कार्रवाई पूरी करने के बाद क्राइम सीन को सील किया, तो उस सीलिंग प्रक्रिया को भी कैमरे में पूरी पारदर्शिता के साथ रिकॉर्ड किया गया.
कुल 34 मिनट का यह वीडियो फुटेज अब आधिकारिक तौर पर सीबीआई को सौंप दिया गया है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस वीडियो को अपने सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत के रूप में शामिल किया है. इस वीडियो की मदद से सीबीआई को घटना के तुरंत बाद की वास्तविक स्थिति (Actual Crime Scene) को हूबहू समझने और गवाहों व आरोपियों के बयानों का भौतिक सत्यापन (Verification) करने में बहुत बड़ी मदद मिली है. तफ्तीश के दौरान सीबीआई के आला अधिकारियों ने कांस्टेबल राघवेंद्र सिंह पटेल की इस पेशेवर कार्यप्रणाली और कर्तव्यनिष्ठा की जमकर सराहना की है, क्योंकि जहां बाकी मशीनरी चूक गई, वहां इस जवान की सूझबूझ ने केस को बिखरने से बचा लिया.
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