Tomato Potato Grafting Technique: वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) ने खेती की एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक पेश की है, जो आने वाले समय में छोटे और सीमांत किसानों की तकदीर बदल सकती है. संस्थान के वैज्ञानिकों ने 'ग्राफ्टिंग' तकनीक के जरिए एक ही पौधे से टमाटर और आलू, दोनों की पैदावार लेने में सफलता हासिल की है. इस तकनीक में टमाटर के पौधे को ऊपर (Sion) और आलू के पौधे को नीचे (Rootstock) के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. परिणाम स्वरूप, मिट्टी के ऊपर लाल टमाटर की फसल लहलहाती है, जबकि उसी पौधे की जड़ों में आलू तैयार होते हैं. यह नवाचार न केवल जमीन और पानी की बचत कर रहा है, बल्कि किसानों की लागत घटाकर उनकी आमदनी को कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है. खुद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है.
ICAR-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी ग्राफ्टिंग तकनीक का अद्भुत प्रयोग कर रहा है। इस तकनीक के माध्यम से टमाटर के साथ बैगन की खेती हो रही है। इसमें एक ही पौधे में दो फसले हो जाती हैं, जिससे लागत कम होती है, उत्पादन बढ़ता है और आमदनी भी अधिक होती है। pic.twitter.com/414MPBVLKH
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) February 26, 2026
सीमित संसाधनों में दोहरी पैदावार का मॉडल
IIVR द्वारा विकसित यह तकनीक खास तौर पर उन क्षेत्रों और किसानों के लिए वरदान है जिनके पास खेती के लिए कम जमीन उपलब्ध है. ग्राफ्टिंग के इस तरीके से भूमि, पानी और खाद जैसे पोषक तत्वों का इष्टतम (Optimum) उपयोग सुनिश्चित होता है. किसान को अलग-अलग फसलों के लिए अलग खेत तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे जुताई और सिंचाई का खर्च आधा हो जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, एक ही पौधे से दोनों सब्जियां मिलने के कारण पोषक तत्वों का वितरण भी संतुलित रहता है, जिससे पैदावार की गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता.
लागत में कमी और बढ़ता मुनाफा
इस दोहरी खेती मॉडल का सबसे बड़ा फायदा 'कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन' में कमी आना है. ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए तैयार किए गए ये पौधे बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं, जिससे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है. एक ही समय में एक ही स्थान से दो फसलें मिलने के कारण बाजार में किसान की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ती है; यदि किसी समय टमाटर के दाम गिरते हैं, तो आलू उसे आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य की 'स्मार्ट फार्मिंग' का आधार बनेगी, जहां कम लागत में अधिकतम पोषण और मुनाफा प्राप्त किया जा सके.
सब्जी अनुसंधान में नया अध्याय
वाराणसी का IIVR संस्थान लंबे समय से सब्जियों की नई प्रजातियों और उन्नत तकनीकों पर काम कर रहा है. टमाटर और आलू की इस सफल जुगलबंदी ने सब्जी अनुसंधान में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. संस्थान अब इस तकनीक को प्रयोगशाला से निकालकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर जोर दे रहा है. आने वाले दिनों में यह तकनीक न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के सब्जी उत्पादक किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है, जिससे 'प्रति बूंद अधिक फसल' और 'दोगुनी आय' का सपना साकार होगा.
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