SIR Madhya Pradesh: लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत माने जाने वाले वोट के अधिकार पर मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए जागृत आदिवासी दलित संगठन ने दावा किया है कि ज़िंदा लोगों को “मृत” दिखाकर उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा रहा है.
गुरुवार को संगठन के कार्यकर्ता पाटी तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार बबली बर्डे से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण में हो रही कथित अनियमितताओं को लेकर मौखिक चर्चा की और कड़ी आपत्ति दर्ज कराई.
संगठन के अनुसार, पिछले सप्ताह भाकीराम सोलंकी नामक एक आदिवासी युवक का नाम इस आधार पर मतदाता सूची से काट दिया गया कि वह “मृत” है, जबकि वह पूरी तरह जीवित है. इसके अलावा भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें ज़िंदा लोगों को मृत या अनुपस्थित घोषित कर दिया गया.
जाय गांव के गुलसिंग भुरला, भिलीबाई पति सामा, बाली पति सादरिया और सुभद्रा पति नानरिया के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. वहीं पीपरकुंड गांव के प्रताप पिता बूड़ा मेहता और रेखा पति प्रताप को “अनुपस्थित” बताकर सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि सर्वे के समय वे गांव में मौजूद थे.
सबसे चिंताजनक बात यह है कि हटाए गए मतदाताओं की सूची अब तक न तो बूथ स्तर पर लगाई गई है और न ही तहसील या जनपद कार्यालय में. कई लोगों को यह तक पता नहीं है कि उनका नाम मतदाता सूची में मौजूद है या नहीं. अब तक किसी भी तरह की पुनः जांच या सत्यापन प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है. इससे हज़ारों आदिवासी नागरिकों का वोट का अधिकार खतरे में पड़ गया है.
जागृत आदिवासी दलित संगठन ने मांग की है कि हटाए गए सभी नामों की सूची हिंदी में सार्वजनिक की जाए और हर बूथ, तहसील व जनपद कार्यालय में प्रदर्शित की जाए. साथ ही सभी गलत कटौतियों की स्वतंत्र जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. लोकतंत्र में मताधिकार नागरिक की पहचान होता है. अगर प्रशासनिक लापरवाही से ज़िंदा लोगों को “मृत” घोषित कर दिया जाए, तो यह सिर्फ एक गलती नहीं बल्कि लोकतंत्र की नींव पर सीधा प्रहार है.
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