Shri Mahakal Mahotsav: उज्जयिनी, जहाँ काल स्वयं नतमस्तक होता है और आस्था अनादि से अनंत की ओर प्रवाहित होती है, उसी पावन नगरी में भारतवर्ष का स्वाभिमान पर्व अंतर्गत 14 से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित होने जा रहा श्रीमहाकाल महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतवर्ष का स्वाभिमान पर्व है. इस महोत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जाएगा. यह महोत्सव शिव की चेतना, लोक की परंपरा और वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा. इस अवसर पर श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की नई वेबसाइट का लोकार्पण एवं महाकाल सृष्टि का समय यूट्यूब सीरीज का शुभारंभ भी किया जायेगा.
मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने कहा कि यह आयोजन, मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्रीजी के विरासत से विकास के संकल्प को साकार करता हुआ दिखाई देगा. महाकाल की नगरी में संगीत, नृत्य, नाट्य और लोक परंपराओं का यह समागम देश-दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर उज्जैन को एक नई ऊँचाई प्रदान करेगा.
ये कार्यक्रम होंगे
महोत्सव की मुख्य सभाओं में देश के ख्यातिलब्ध कलाकार भगवान शिव की आराधना अपनी स्वर-लहरियों से करेंगे. 14 जनवरी: महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ 'शिवोऽहम्' की संगीतमय प्रस्तुति देंगे. 15 जनवरी: मुम्बई का प्रसिद्ध 'द ग्रेट इंडियन क्वायर' 'शिवा' थीम पर प्रस्तुति देगा. 16 जनवरी: सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीत यात्रा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी. 17 जनवरी: इंदौर के श्रेयश शुक्ला एवं मुम्बई के विपिन अनेजा व उनके बैंड द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति होगी. 18 जनवरी: महोत्सव का समापन इंडोनेशिया (कोकोरदा पुत्रा) और श्रीलंका (अरियारन्ने कालूराच्ची) के दलों द्वारा प्रस्तुत 'शिव केंद्रित नृत्य नाटिका' से होगा, जो महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को दर्शाएगा.
श्रीराम तिवारी ने कहा कि श्रीमहाकाल महोत्सव, अपने स्वरूप में देश में पहली बार आयोजित हो रहा ऐसा आयोजन है, जहाँ आध्यात्म, लोक और वैश्विक संस्कृति एक साथ मंच साझा करेंगे. यह महोत्सव उज्जैन को केवल एक धार्मिक तीर्थ के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित करेगा. निश्चय ही यह आयोजन देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगा.
त्रिवेणी संग्रहालय में प्रतिदिन जनजातीय संस्कृति के होंगे दर्शन
महोत्सव में प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में मध्यप्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के दर्शन होंगे. इसमें छिंदवाड़ा का भड़म, बैतूल का ठाट्या, धार का भगोरिया और सागर का बरेदी जैसे पारंपरिक नृत्यों का प्रदर्शन होगा. प्रतिदिन निकलने वाली 'कला यात्रा' शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए श्रीमहाकाल लोक पहुँचेगी. इसमें शिव बारात, डमरू वादन और मलखंब के रोमांचक प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होंगे.
15 जनवरी को होगा बौद्धिक विमर्श
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ, 15 जनवरी को प्रातः 10:30 बजे एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा. इसका विषय 'शिव तत्त्व और महाकाल: पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में' रखा गया है, जहाँ विद्वान शिव तत्व की दार्शनिक गहराईयों पर प्रकाश डालेंगे. आमजन को इस भक्तिमय उत्सव में सहभागी होने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है.
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