देशभर में लाखों छात्र हर साल NEET और JEE जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन बहुत कम ऐसे छात्र होते हैं जो एक साथ कई राष्ट्रीय परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर अपनी अलग पहचान बना पाते हैं. मध्य प्रदेश के जबलपुर की रहने वाली शमी चौधरी ने अपनी मेहनत, अनुशासन और लगातार प्रयास के दम पर ऐसा ही कर दिखाया है. शमी ने एक ही साल में NEET-UG, JEE Main, NISER, IISER Aptitude Test, CUET और NSEB समेत 7 राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है. खास बात यह है कि इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद उनका लक्ष्य केवल एक है, भारतीय सेना में डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना.
एक साल में 7 राष्ट्रीय परीक्षाओं में सफलता
शमी चौधरी ने वर्ष 2026 में कई प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने NEET-UG में 650 अंक हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 6315 प्राप्त की. इसके अलावा JEE Main में 96.69 परसेंटाइल स्कोर कर यह साबित कर दिया कि अगर तैयारी सही दिशा में की जाए तो एक ही छात्र अलग-अलग क्षेत्रों की परीक्षाओं में भी सफलता पा सकता है.
JEE Main में भी दिखाया दम
दिलचस्प बात यह है कि शमी का पूरा ध्यान मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी पर था. उन्होंने गणित की अलग से विशेष तैयारी नहीं की थी, फिर भी JEE Main में 96.69 परसेंटाइल हासिल किया. यह उपलब्धि उनकी मजबूत अवधारणाओं और पढ़ाई के प्रति गंभीरता को दर्शाती है.
NISER, IISER और CUET में भी शानदार प्रदर्शन
NEET और JEE के अलावा शमी ने विज्ञान और अनुसंधान क्षेत्र की प्रतिष्ठित परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा साबित की. NISER की प्रवेश परीक्षा में उन्हें 1483वीं रैंक मिली. वहीं CUET में बायोलॉजी विषय में 99.86 परसेंटाइल और केमिस्ट्री में 99.40 परसेंटाइल हासिल किए. उन्होंने IISER Aptitude Test भी सफलतापूर्वक क्वालीफाई किया, जिससे देश के प्रमुख विज्ञान और रिसर्च संस्थानों में प्रवेश के रास्ते उनके लिए खुल गए हैं.
सेना में डॉक्टर बनकर करना चाहती हैं देश की सेवा
कई बड़ी परीक्षाओं में सफलता पाने के बाद भी शमी का लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है. उनका सपना भारतीय सेना में डॉक्टर बनना है. इसके लिए उनकी पहली प्राथमिकता आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे में प्रवेश लेना है. यदि वहां प्रवेश नहीं मिलता है, तो वह एम्स से एमबीबीएस की पढ़ाई कर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहती हैं. उनका मानना है कि डॉक्टर बनकर सेना में सेवा देना देश के प्रति उनके योगदान का सबसे अच्छा माध्यम होगा.
मोबाइल से दूरी और नियमित पढ़ाई से मिली सफलता
शमी अपनी सफलता का श्रेय अनुशासित जीवनशैली को देती हैं. उनका कहना है कि परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से लगभग पूरी तरह दूरी बना ली थी. वह रोज करीब 8 घंटे पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई करती थीं. उनके अनुसार, सफलता किसी एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं होती, बल्कि रोजाना की गई छोटी-छोटी कोशिशों का नतीजा होती है.
परिवार से मिला पढ़ाई का बेहतर माहौल
शमी के परिवार का शैक्षणिक माहौल भी उनकी सफलता में महत्वपूर्ण रहा. उनके पिता अनुपम राय चौधरी जबलपुर के शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी माता डॉ. सपना जैन चौधरी एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर हैं. घर में शिक्षा और ज्ञान को हमेशा महत्व दिया गया, जिसने शमी को अपने लक्ष्यों के प्रति गंभीर बनाए रखा.