Rajendra Bharti BJP Offer Allegation: कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सजा और विधानसभा सदस्यता रद्द होने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. सदस्यता जाने के अगले ही दिन भारती ने भाजपा और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताते हुए दावा किया कि उन्हें भाजपा में शामिल होने के बदले मोटी रकम का ऑफर दिया गया था. भारती के आरोपों के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है.
सजा और सदस्यता रद्द होने के बाद खुलकर बोले भारती
राजेंद्र भारती ने कहा कि जिस मामले में उन्हें सजा हुई है, वह वर्षों पुराना है, लेकिन अब उसे जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया गया. उनका आरोप है कि उन्हें फंसाने के लिए पूरे घटनाक्रम को तोड़‑मरोड़ कर अदालत में रखा गया. भारती ने कहा कि यह सब कुछ सोची‑समझी रणनीति का हिस्सा है.
भाजपा और नरोत्तम मिश्रा पर सीधे आरोप
भारती ने भाजपा और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि डबरा सीट आरक्षित होने के बाद 2008 में नरोत्तम मिश्रा ने दतिया से चुनाव लड़ा था. उस समय आचार संहिता उल्लंघन और ‘पेड न्यूज' को लेकर कई शिकायतें हुई थीं. भारती का कहना है कि तभी से उनके ऊपर दबाव बनना शुरू हो गया था.
‘बीजेपी जॉइन करने पर 75 करोड़ का ऑफर' का दावा
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि उन पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवार और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर भी फर्जी मामले दर्ज कराए गए. उन्होंने दावा किया कि उनके कारोबार तक को बंद कराने की कोशिश की गई, ताकि उन पर लगातार दबाव बना रहे.
राजेंद्र भारती का सबसे बड़ा आरोप भाजपा में शामिल होने से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि एक केंद्रीय मंत्री के ओएसडी के जरिए उनसे संपर्क किया गया. आरोप है कि भाजपा में आने पर फर्जी खबरें और अन्य केस खत्म कराने का लालच दिया गया, साथ ही धमकियां भी दी गईं. भारती के मुताबिक, उन्हें इसके बदले करीब 75 करोड़ रुपये तक की पेशकश की गई और केस ‘निपटवाने' की बात कही गई.
CBI जांच और उपचुनाव का आरोप
भारती ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है. उनका कहना है कि उन्हें जानबूझकर अयोग्य घोषित कराया गया, ताकि उपचुनाव का रास्ता साफ हो सके. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक हाईकोर्ट से अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक उनकी सदस्यता समाप्त नहीं की जानी चाहिए थी. पूर्व विधायक ने राहुल गांधी के केस का उदाहरण देते हुए कहा कि ऊपरी अदालत से राहत मिलने पर तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है. इसलिए जल्दबाजी में की गई कार्रवाई गलत है.
एफडी केस को लेकर भी सवाल
भारती ने बताया कि एफडी से जुड़ा मामला पहले जॉइंट रजिस्ट्रार स्तर पर था, जिसे बाद में गलत तरीके से आपराधिक केस बना दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्राइवेट शिकायत और धारा 319 के जरिए उन्हें आरोपी बनाया गया. साथ ही यह भी दावा किया कि गवाहों और जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई.
‘राणा सांगा की तरह शिकार बनाया गया'
राजेंद्र भारती ने खुद को राणा सांगा की तरह साजिश का शिकार बताते हुए कहा कि यह पूरा मामला एक सोची‑समझी राजनीतिक चाल है, जिसका मकसद उन्हें राजनीति से बाहर करना है. वहीं भाजपा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. पार्टी मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि देश संविधान और न्यायपालिका के आधार पर चलता है. उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले को राजनीतिक रंग देना गलत है.
‘70 करोड़ ठुकराने की बात हास्यास्पद'- भाजपा
आशीष अग्रवाल ने तंज कसते हुए कहा कि जिन पर 10 लाख रुपये से जुड़े अपराध सिद्ध हो रहे हैं, उनका 70‑75 करोड़ रुपये ठुकराने की बात करना हास्यास्पद है. उन्होंने यह भी कहा कि भारती के खिलाफ केस कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल में दर्ज हुआ था.