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This Article is From Apr 04, 2026

श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला: कलेक्टर ने 18 पटवारियों पर केस चलाने की दी मंजूरी; अब गिरफ्तारी की तैयारी

Sheopur Flood Relief Scam: श्योपुर के बड़ौदा बाढ़ राहत घोटाले में 18 पटवारियों पर अदालत में केस चलाने की मंजूरी. पुलिस जल्द कर सकती है गिरफ्तारी. पढ़िए पूरी खबर.

श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला: कलेक्टर ने 18 पटवारियों पर केस चलाने की दी मंजूरी; अब गिरफ्तारी की तैयारी
श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला: 18 पटवारियों पर केस, गिरफ्तारी संभव

Sheopur Flood Relief Scam: श्योपुर जिले में वर्ष 2021 की बाढ़ राहत राशि के वितरण में हुए बहुचर्चित घोटाले में कार्रवाई तेज हो गई है. बड़ौदा तहसील से जुड़े इस मामले में कलेक्टर अर्पित वर्मा ने 18 आरोपी पटवारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति दे दी है. अनुमति मिलते ही अब बड़ौदा पुलिस गिरफ्तारी की दिशा में आगे बढ़ सकती है. इससे पहले इस घोटाले की मुख्य आरोपी तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है. प्रशासनिक कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिए हैं कि बाढ़ राहत में गड़बड़ी करने वालों पर शिकंजा कसने के दिन शुरू हो चुके हैं.

कलेक्टर की अनुमति के बाद बढ़ी पटवारियों की मुश्किलें

बड़ौदा तहसील में सामने आए बाढ़ राहत मुआवजा घोटाले को लेकर श्योपुर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. कलेक्टर अर्पित वर्मा ने भ्रष्टाचार के इस मामले में आरोपी बनाए गए 18 पटवारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की औपचारिक अनुमति जारी कर दी है. इस स्वीकृति के बाद बड़ौदा पुलिस अब इन आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है. प्रशासनिक गलियारों में इसे लंबे समय से लंबित कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि मामले में पहले ही जांच पूरी हो चुकी थी और अभियोजन की अनुमति का इंतजार था.

Sheopur Flood Relief Scam: श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला; 18 पटवारियों पर केस, गिरफ्तारी संभव

Sheopur Flood Relief Scam: श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला; 18 पटवारियों पर केस, गिरफ्तारी संभव

किन धाराओं में चलेगा मुकदमा?

18 पटवारियों के खिलाफ बड़ौदा थाने में दर्ज एफआईआर में भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 409 और 120‑बी सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज है. इन धाराओं के तहत अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद अब मामला न्यायालय में आगे बढ़ेगा. पुलिस सूत्रों के अनुसार, अदालत से गिरफ्तारी वारंट मिलते ही आरोपियों की धरपकड़ शुरू की जा सकती है.

2021 की बाढ़ बना घोटाले की वजह

साल 2021 में श्योपुर जिले के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने थे. बड़ौदा तहसील भी इससे अछूती नहीं रही. बड़ी संख्या में लोगों को नुकसान हुआ, जिसके बाद सरकार ने बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के लिए जिला प्रशासन को आर्थिक सहायता वितरित करने के निर्देश दिए थे. हालांकि जांच में सामने आया कि असली बाढ़ पीड़ितों का हक काटकर फर्जी तरीके से राहत राशि का बंदरबांट कर दिया गया. यही से यह मामला एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आया.

2 करोड़ 57 लाख की राशि फर्जी खातों में डाली गई

जांच में स्पष्ट हुआ कि तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर और उनके अमले में शामिल पटवारियों ने फर्जी बाढ़ पीड़ितों के नाम पर करीब 2 करोड़ 57 लाख रुपये की राहत राशि जारी कर दी. यह पैसा असल जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय परिचितों और रिश्तेदारों के फर्जी खातों में डाल दिया गया. घोटाले के उजागर होने के बाद तत्कालीन कलेक्टर संजय कुमार के निर्देश पर बड़ौदा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी.

110 आरोपी, कुछ की नौकरी गई, कुछ ने लौटाया पैसा

इस मामले में तहसीलदार अमिता तोमर, 28 पटवारियों समेत कुल 110 लोगों को आरोपी बनाया गया था. कार्रवाई के दौरान कुछ पटवारियों को बर्खास्त भी किया गया, जबकि कुछ ने घोटाले की रकम ब्याज सहित जिला प्रशासन के खाते में वापस जमा कर दी. इसके बावजूद जांच एजेंसियों ने इसे गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए आपराधिक कार्रवाई जारी रखी.

अमिता तोमर की गिरफ्तारी के बाद तेज हुई कार्रवाई

घोटाले की मुख्य आरोपी रहीं तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अग्रिम जमानत याचिकाएं लगाईं, लेकिन दोनों स्तरों पर याचिकाएं खारिज कर दी गईं. इसके बाद बड़ौदा पुलिस ने उन्हें ग्वालियर से गिरफ्तार कर श्योपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें शिवपुरी जेल भेज दिया गया. फिलहाल अमिता तोमर शिवपुरी जेल में बंद हैं.

इन 18 पटवारियों पर चलेगा केस

अदालत में जिन 18 पटवारियों के खिलाफ केस चलाया जाएगा, उनमें मेवाराम गोरछिया, हेमंत मित्तल, राजकुमार शर्मा, महेंद्र सिंह जाटव, सुमित देशलेहरा, योगेश जिंदल, विनोद भूषण, अखिलेश जैन, भोलाराम गुप्ता, हुकुम बिसारिया, राजवीर जाटव, बृजराज मीणा, रामनरेश जाट, रामदयाल जागा, सोनेराम धाकड़, नीतेश मीणा, संजय रावत और शंकरलाल मार्सकोले शामिल हैं. इनमें से शंकरलाल मार्सकोले वर्तमान में छिंदवाड़ा जिले की सौसर तहसील में पदस्थ हैं, जबकि शेष 17 पटवारी श्योपुर जिले की विभिन्न तहसीलों में कार्यरत हैं.

निलंबन और विभागीय जांच के भी आसार

कानूनी कार्रवाई के साथ‑साथ इन 18 पटवारियों के खिलाफ निलंबन और विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है. प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अदालत में मुकदमा चलने के बाद सेवा नियमों के तहत अलग से कार्रवाई की जा सकती है.

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