Operation Wild Trap II: वन्यजीवों की सुरक्षा व शिकार से बचाने के लिये; MP में चलेगा ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप II

Operation Wild Trap in Madhya Pradesh: गाइडलाइन में कहा गया है कि गश्ती के दौरान वन राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र एवं कृषि क्षेत्र की बागड़/फैंसिंग में सर्चिंग की कार्यवाही की जाये. प्रदेश में वर्तमान में 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड एवं एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड कार्यरत हैं. इनकी सहायता से वन अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया जाये एवं अपराध में संलिप्त अपराधी का पता लगाकर तत्काल कार्यवाही की जाये.

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Operation Wild Trap II: वन्यजीवों की सुरक्षा व शिकार से बचाने के लिये; MP में चलेगा ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप II

Operation Wild Trap Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में वन विभाग (Madhya Pradesh Forest Department) ने वन्य-जीवों की सुरक्षा एवं शिकार से बचाव के लिये 10 जनवरी से 15 फरवरी तक ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-II चलाये जाने के आदेश जारी कर दिये हैं. जारी आदेश में वाइल्ड ट्रैप-II में कार्यवाही करने के लिये प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वन मण्डल एवं 11 परियोजना मण्डलों ने वन्य-जीवों के अवैध शिकार के शिकारियों तथा मांस के शौकीन व्यक्तियों द्वारा अपनाये जाने वाले फंदा, विद्युत करंट, स्नेयर ट्रैप, खटका जैसे साधन से शिकार करने वालों के खिलाफ ऑपरेशन वाइल्ड लाइफ-II चलाया जायेगा.

ऐसा है एक्शन प्लान

ऑपरेशन वाइल्ड लाइफ ट्रैक-II में प्रदेश के प्रत्येक वन मण्डल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मण्डल इकाई में एक उप वन मण्डल स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाये, जो ऑपरेशन से संबंधित निर्धारित प्रारूप में जानकारी एक सप्ताह में ऑनलाइन दर्ज करेगा. ऑपरेशन वाइल्ड लाइफ ट्रैप- II की अवधि एक माह 5 दिवस की होगी. सम्पूर्ण वन मण्डल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मण्डल इकाई में सघन गश्ती दिन और रात्रि में सप्ताह में न्यूनतम 3 दिवस परिक्षेत्र अधिकारी एवं अधीनस्थ 2 दिवस वन मण्डलाधिकारी, उप वन मण्डलाधिकारी और एक दिवस क्षेत्र संचालक, मुख्य वन संरक्षक अनिवार्य रूप से करेंगे. इनमें सभी अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल रहेंगे. गश्ती के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों एवं शिकारी, घुमक्कड़ समुदाय के डेरों की चेकिंग, सर्चिंग की जाये. सर्चिंग के दौरान निकटतम डॉग स्क्वाड दस्ता भी साथ रखे जायें और मेटल डिटेक्टर उपकरण का भी उपयोग किया जाये.

गाइडलाइन में कहा गया है कि गश्ती के दौरान वन राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र एवं कृषि क्षेत्र की बागड़/फैंसिंग में सर्चिंग की कार्यवाही की जाये. प्रदेश में वर्तमान में 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड एवं एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड कार्यरत हैं. इनकी सहायता से वन अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया जाये एवं अपराध में संलिप्त अपराधी का पता लगाकर तत्काल कार्यवाही की जाये.

संबंधित ग्रामों में वन्य-प्राणी के अवैध शिकार को रोकने के लिये प्रचार-प्रसार किया जाये. साथ ही ग्राम, नगर में पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी लेकर उसे वन परिक्षेत्र में संधारित आरोपी निगरानी पंजी में दर्ज किया जाये.

इसके साथ ही वन भूमि अथवा वन्य-प्राणी विचरित क्षेत्र से जाने वाली विद्युत लाइन के नीचे या उसके समीप गश्ती की जाये तथा आवश्यकता अनुसार स्थानीय विद्युत विभाग के अमले को भी साथ में रखा जाये. शिकार के लिये लगाये गये फंदे, फैलाये गये विद्युत करंट वायर, वन भूमि अथवा वन्य-प्राणी विचरित क्षेत्र पर पाये जाने पर प्रकरण में आये साक्ष्यों के आधार पर विधिवत जप्ती कर अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया जाये एवं अपराध में संलिप्त अपराधी का पता लगाकर तत्काल कार्यवाही की जाये.

ऑपरेशन वाइल्ड लाइफ ट्रैप-II के अंतर्गत वन मण्डल/टाइगर रिजर्व/वन विकास मण्डल में की जा रही कार्यवाही की समीक्षा प्रतिदिन वन मण्डलाधिकारी या सक्षम अधिकारी करेंगे. प्रत्येक सप्ताह संबंधित मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्र संचालक, क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक द्वारा मॉनीटरिंग की जायेगी. प्रत्येक 7 दिवस में की गई कार्यवाही की जानकारी मुख्यालय को भेजा जाना सुनिश्चित किया जाये.

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