मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में 19 जुलाई को जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे पर हुई पांच लोगों की मौत की घटना को शुरुआत में महज एक सड़क हादसा माना गया था. लेकिन पुलिस की मुस्तैद जांच में यह मामला एक सुनियोजित और खौफनाक हत्याकांड की साजिश निकला. पुलिस का दावा है कि घटनास्थल पर मिला महज दो इंच का प्लास्टिक का अंग्रेजी अक्षर 'A' इस पूरे हत्याकांड का सबसे अहम सुराग बना.
रातभर की जांच में मिला 'A' अक्षर का सुराग
जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल पर छानबीन करते समय टाटा कंपनी के मोनोग्राम का टूटा हुआ अंग्रेजी अक्षर 'A' मिला. यही छोटा सा सबूत पूरे मामले का रुख बदलने वाला साबित हुआ. इसके बाद पुलिस ने शाहपुरा से लेकर घटनास्थल तक नेशनल हाईवे पर लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. तकनीकी जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और सीसीटीवी विश्लेषण के आधार पर पुलिस हत्या में इस्तेमाल किए गए हाईवा डंपर तक पहुंच गई. पुलिस ने इस डंपर को हीरापुर-बंदरोहा के जंगलों से लावारिस हालत में बरामद किया, जिसके बाद इस कथित हत्याकांड की परतें खुलनी शुरू हुईं और मामला सड़क हादसे से सीधे हत्या की साजिश में तब्दील हो गया.
रेत माफिया और रंजिश का एंगल
पुलिस के अनुसार, समाजवादी पार्टी के युवा नेता राजेंद्र पटेल अवैध रेत उत्खनन और क्षेत्र के कथित रेत माफिया का खुलकर विरोध कर रहे थे. इसी रंजिश के चलते मुख्य आरोपी आनंद पटेल ने अपने साथियों के साथ मिलकर उन्हें रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची. आरोप है कि पूरी घटना को एक दुर्घटना का रूप देने के लिए तेज रफ्तार हाईवा डंपर से कुचलने की योजना बनाई गई थी.
जबलपुर के नामी डॉक्टर का नाम भी आया सामने
जांच के दौरान जबलपुर के एक निजी अस्पताल के संचालक डॉ. अमित खरे का नाम भी इस साजिश में सामने आया है. पुलिस का आरोप है कि डॉ. खरे ने इस जघन्य हत्याकांड को सड़क दुर्घटना का स्वरूप देने की सलाह दी थी और साजिश में सहयोग किया था. इस आधार पर पुलिस ने उन्हें भी मामले में सह-आरोपी बनाया है और उनकी भूमिका की गहन जांच की जा रही है.
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चुनाव के बाद से चल रही थी दुश्मनी
मृतक राजेंद्र पटेल के पिता कुंजीलाल पटेल का कहना है कि यह कोई सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरी तरह से सुनियोजित हत्या है. उनका आरोप है कि उनके बेटे की मुख्य आरोपी से पुरानी रंजिश थी. उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि पूर्व में भी डॉ. अमित खरे ने उनके बेटे पर गोली चलाई थी.
वहीं, राजेंद्र पटेल के भाई प्रेम पटेल का कहना है कि चुनाव के बाद से ही आनंद के साथ राजनीतिक दुश्मनी चल रही थी. इसके अलावा डॉ. अमित खरे के साथ व्यापारिक लेन-देन को लेकर भी पुराना विवाद चल रहा था, और इसी वजह से राजेंद्र पटेल की हत्या की साजिश रची गई.
पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी
फिलहाल पुलिस ने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और षड्यंत्र की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि हत्या की योजना कब और कहां बनाई गई, इसमें और कौन-कौन से लोग शामिल थे, तथा इस साजिश में डॉ. अमित खरे की भूमिका कितनी गहरी थी.
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