राजधानी भोपाल बुधवार को किसान आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र बन गई. प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े और रोशनपुरा इलाके तक पहुंच गए. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगह आमना-सामना हुआ, जबकि किसानों ने साफ कह दिया कि मांगें नहीं मानी गईं तो वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे.
दूसरी ओर आंदोलन को देखते हुए मोहन सरकार भी सक्रिय नजर आई. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मंत्रालय में 16 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और मंत्री समूह के बीच अहम बैठक शुरू हुई. दिनभर चली कवायद के बाद भी देर शाम तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका.
राजधानी में डटे हजारों किसान
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदेशभर से किसान भोपाल पहुंचे हैं. आंदोलनकारी किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे किसानों को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त सुरक्षा व्यवस्था की. कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई और बसें खड़ी कर रास्ते बंद कर दिए गए.
सीएम हाउस की ओर बढ़े प्रदर्शनकारी
पुलिस की रोक के बावजूद किसान लगातार आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे. रोशनपुरा चौराहे के पास किसान एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. किसानों का कहना था कि उनके कई साथी पीछे से आ रहे हैं, जिनके पहुंचने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी. प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव की भी बात कही. कुछ किसान सीएम आवास के 1 किमी दूर तक पहुंच चुके हैं.
बसों पर चढ़कर किया विरोध
मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले मार्ग पर पुलिस ने कई बसें खड़ी कर रास्ता बंद कर दिया था. इससे नाराज कुछ किसान बसों पर चढ़ गए और वहीं से नारेबाजी करने लगे. पुलिस अधिकारियों ने समझाइश देकर उन्हें नीचे उतारा. इसके बाद भी किसानों का प्रदर्शन जारी रहा और वे सड़क पर बैठकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे.
एडिशनल कमिश्नर मोनिका शुक्ला बनीं ढाल
आंदोलन के दौरान एक दिलचस्प और चर्चा में रहने वाला दृश्य भी देखने को मिला. जब कुछ प्रदर्शनकारी बस हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे, तब एडिशनल कमिश्नर मोनिका शुक्ला बस के सामने खड़ी हो गईं. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका. उनके हस्तक्षेप के बाद स्थिति नियंत्रित हुई और किसान वहां से आगे नहीं बढ़ सके.
राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
किसान आंदोलन को देखते हुए भोपाल पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में रही. मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया. पुलिस कमिश्नर संजय कुमार स्वयं हालात पर नजर बनाए हुए हैं. मंत्री इंदल सिंह कंसाना की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है. प्रशासन का प्रयास है कि आंदोलन शांतिपूर्ण बना रहे और कानून व्यवस्था प्रभावित न हो.
मंत्रालय में सरकार और किसानों के बीच वार्ता
आंदोलन के समानांतर सरकार ने बातचीत का रास्ता भी खुला रखा है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गठित मंत्री समूह ने मंत्रालय में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाया. बैठक में कृषि मंत्री इंदल सिंह कंसाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और राज्य मंत्री कृष्णा गौर शामिल हुए.
किसानों के साथ चर्चा में केवल मंत्री ही नहीं, बल्कि कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे. बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, कृषि संचालक निशांत वरवड़े, भोपाल संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा और भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने भी हिस्सा लिया. सरकार की ओर से किसानों की मांगों पर समाधान तलाशने की कोशिश की.
16 किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल
बैठक में भारतीय किसान यूनियन, किसान स्वराज संगठन, किसान महापंचायत, राष्ट्रीय किसान मोर्चा, राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ, किसान सेवा संघ और अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. सभी संगठनों ने अपनी-अपनी मांगें और समस्याएं सरकार के सामने रखीं.
क्या हैं किसानों की मुख्य मांगें?
किसानों की सबसे बड़ी मांग एमएसपी पर शत-प्रतिशत मूंग खरीदी की है. इसके अलावा वे ई-टोकन व्यवस्था में सुधार, समय पर खाद उपलब्ध कराने और किसानों से जुड़े अन्य लंबित मुद्दों के समाधान की मांग कर रहे हैं. आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि इन समस्याओं को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है.