Tulsi Silawat Gwalior Visit: ग्वालियर दौरे पर पहुंचे प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट उस वक्त नाराज़ हो गए, जब मीडिया ने उनके जिले में कम आने जाने को लेकर सवाल दाग दिए. सवाल सुनते ही मंत्री का लहजा सख्त हो गया और उन्होंने मीडिया को साफ शब्दों में कहा कि कोई उन्हें निर्देश देने का अधिकार नहीं रखता.
दरअसल, मीडिया ने जब पूछा कि प्रभारी मंत्री ग्वालियर तभी क्यों सक्रिय दिखते हैं, जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का दौरा होता है, तो यह सवाल मंत्री को नागवार गुज़रा. उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाषा का सही इस्तेमाल किया जाए और उनके आने जाने पर सवाल उठाने का हक किसी को नहीं है.
'रिकॉर्ड उठा लो, फिर सवाल करना'
प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि उनके दौरे और गतिविधियों का पूरा लेखा जोखा पार्टी और सरकार के पास मौजूद है. उन्होंने मीडिया से कहा कि सालभर का रिकॉर्ड निकालकर देख लें, उसके बाद तय करें कि प्रभारी मंत्री कितनी बार जिले में आता है. उनका कहना था कि जवाबदेही सरकार और संगठन के प्रति है, न कि कैमरे के सामने.
बैठक में उठा किसानों का मुद्दा
मीडिया से हुई तीखी बातचीत से पहले प्रभारी मंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक भी की. बैठक में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के मुद्दे पर चर्चा हुई. मंत्री ने जानकारी दी कि ग्वालियर जिले के भितरवार क्षेत्र में 1711 किसान ओलावृष्टि से प्रभावित हुए हैं, जिन्हें 20 फरवरी तक 2 करोड़ 63 लाख रुपये की मुआवजा राशि दी जाएगी.
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एक ओर मीडिया सवाल पूछने के अधिकार की बात कर रहा है, वहीं मंत्री का कहना है कि उनके कामकाज का मूल्यांकन सरकार और पार्टी करेगी. प्रभारी मंत्री की इस प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. लिहाजा, ग्वालियर में यह बयानबाज़ी आने वाले दिनों में सियासी बहस का विषय बन सकती है.
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