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MCBU में भारी वित्तीय अनियमितता, कुलपति शुभा तिवारी के अधिकार सीज! नये कुलगुरू की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू

MCBU Vice Chancellor Powers seized: मध्य प्रदेश शासन ने महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की कुलपति के अधिकार छीन लिए हैं. शासन ने एक आदेश जारी कर धारा 52 (1) के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की है. विवि में वित्तीय अनियमिताओं सहित अन्य मामलों को लेकर कुलगुरु को हटाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है.

MCBU में भारी वित्तीय अनियमितता, कुलपति शुभा तिवारी के अधिकार सीज! नये कुलगुरू की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू

MCBU Vice Chancellor Shubha Tiwari Powers seized: महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय छतरपुर (Maharaja Chhatrasal Bundelkhand University) में भारी वित्तीय अनियमितताओं का मामला उजागर हुआ है. इस मामला के सामने आने के बाद कुलपति के अधिकार छिन लिए गए हैं. वहीं नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है. 

छतरपुर के महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू

दरअसल, महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय छतरपुर में भारी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय में धारा-52 लागू कर दी है. यह कार्रवाई राज्यपाल मंगूभाई छगनभाई पटेल की अनुशंसा पर हुई है. जिसके बाद कुलपति के अधिकार छिन लिए गए. ब

बता दें कि धारा-52 लागू होने पर कुलपति के सभी अधिकार राज्य शासन के अधीन आ जाते हैं. इसके बाद विश्वविद्यालय का संचालन सीधे राज्य सरकार द्वारा किया जाता है.

राज्यपाल और उच्च शिक्षा मंत्री से की गई थी शिकायत

जानकारी के मुताबिक, विश्वविद्यालय में कुलपति शुभा तिवारी, कुलसचिव यशवंत पटेल की नियुक्ति के बाद से ही भारी वित्तीय अनियमितत्ताओं की शिकायतें राज्य सरकार और राज भवन तक लगातार पहुुंच रही थी. छात्रों और विधायकों ने भी वित्तीय अनियमित्ताओं की शिकायतों को बार-बार उठाया, जिसके बाद शासन स्तर पर सख्त कदम उठाने की संभावनाएं बढ गई हैं.

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मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के अपर सचिव अनुपम राजन ने 28 नवम्बर 2025 को एक आदेश जारी किया है. इसमें कहा गया है कि महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर के कार्यकलापों और कुप्रबंधन के संबंध में उपलब्ध कराई गई सामग्री के आधार पर राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है. विवि में ऐसी स्थिति निर्मित हो गई हैं कि शासन मप्र विवि अधिनियम 1973 के नियमों के अनुसार विवि के हितों का अपाय किए बिना नहीं चलाया जा सकता. अत: म.प्र. विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 52 की उपधारा 1 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किया गया है. बता दें कि यह धारा लागू होने के बाद विवि के कुलपति के अधिकार छीन लिए जाते हैं और उन्हें अधिकार विहीन कर दिया जाता है. विवि के सभी अधिकार अब शासन के अधीन हैं.

नई समिति का होगा गठन

धारा-52 की धारा-25 के अनुसार विश्वविद्यालय में वर्तमान विधापरिषद कार्यपरिषद भंग कर नई समिति का गठन राज्यपाल द्वारा किया जाएगा. इसके अलावा 26, 27 में विभिन्न संकायों की बोर्ड ऑफ स्टडी का गठन होगा. धारा 20 के अनुसार विश्वविद्यालय कोर्ट और धारा 54 के अनुसार विद्यार्थी परामर्शी समिति का गठन किया जाएगा. धारा 52 से स्पष्ट है कि महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में जबसे कुलपति शुभा तिवारी और कुलसचिव यशवंत पटेल की नियुक्ति हुई है तब से लगातार वित्तीय अनियमितत्ताओं की शिकायतें राज्यपाल के पास पहुंच रही थी. धारा 13, 14 का मतलब विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के अनुसार कुलपति की नियुक्ति जब तक नहीं होती है तब तक एक उच्च स्तरीय समिति शासन या राज्यपाल द्वारा गठित की जाएगी. धारा 47 के अनुसार वित्तीय वार्षिक रिपोर्ट और धारा 48 के तहत विश्वविद्यालय की लेखा परीक्षण वित्तीय अनियमितत्ताओं का होगा.

विश्वविद्यालय में की गई भारी वित्तीय अनियमितत्ताएं

कुलपति शुभा तिवारी ने अपने कार्यकाल में भारी वित्तीय अनियमितत्ताएं की हैं. जिससे यह विश्वविद्यालय चर्चाओं में आ गया था. दीक्षांत समारोह के दौरान पत्रिकाएं छपवाने में भी नियमों की धज्जियां उड़ाई गई थीं... न कोई कुटेशन मांगे गये थे और न ही किसी प्रकार के नियमों का पालन किया गया था. इसके अलावा और भी लगातार वित्तीय अनियमितत्ताएं इनके कार्यकाल में की गई थीं. जिन सभी की शिकायतें शासन तक पहुंच रहीं थीं.

शराबखोरी का वीडियो हुआ था वायरल

विश्वविद्यालय के बाबू आकाश जैन द्वारा कार्यालय में ही शराब पिये जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.जिसके बाद शिकायतें की गई थी, लेकिन कुलपति द्वारा आकाश जैन को लगातार संरक्षण दिया जा रहा था और कोई कार्रवाई नहीं की गई थी. जिससे विश्वविद्यालय की छवि खराब हो रही थी.

माता सीता के विरूद्ध की थी टिप्पणी

महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय की कुलपति उस समय और अधिक चर्चाओं में आ गई थीं, जब उन्होंने ओरछा के एक कार्यक्रम मेें माता सीता पर अभद्रजनक टिप्पणी की थी. उस टिप्पणी का भारी विरोध हुआ था और उन्हें माफी तक मांगनी पड़ी थी.

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