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“जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा”…भोपाल के मंच से मौलान मदनी का ऐलान, BJP ने ये किया पलटवार

Maulana Mahmood Madani Controversial Statement: मौलाना मदनी की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और इसे लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है.

“जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा”…भोपाल के मंच से मौलान मदनी का ऐलान, BJP ने ये किया पलटवार
Maulana Mahmood Madani: जिहाद पर मौलाना मदनी का विवादित बयान; BJP नेता ने किया ऐसा पलटवार

Maulana Mahmood Madani Controversial Statement: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की नेशनल गवर्निंग बॉडी मीटिंग के दौरान मौलाना महमूद मदनी (Maulana Mahmood Madani) ने जो कुछ कहा उससे बवाल मच गया है. मौलाना महमूद मदनी ने जिहाद से लेकर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई तक पर सवाल उठाते हुए बयान दिए हैं. मदनी ने एसआईआर को लेकर कहा कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है. वहीं उनके बयान पर मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के विधायकत और मंत्री तीखा पलटवार कर रहे हैं. आइए जानते हैं पूरा मामला.

मदनी ने क्या कहा?

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय शासी निकाय की बैठक में इसके अध्यक्ष, मौलाना महमूद मदनी ने कहा, "देश के मौजूदा हालात बहुत संवेदनशील और चिंताजनक हैं. दुख की बात है कि एक खास समुदाय को जबरदस्ती निशाना बनाया जा रहा है, दूसरे समुदाय कानूनी तौर पर बेबस, सामाजिक रूप से अलग-थलग और आर्थिक रूप से बेइज्जत किए जाते हैं. बुलडोज़र एक्शन, मॉब लिंचिंग, वक्फ संपत्ति पर कब्ज़ा और धार्मिक मदरसों और सुधारों के खिलाफ नेगेटिव कैंपेन चलाए जा रहे हैं, ताकि उनके धर्म, पहचान और वजूद को कमज़ोर किया जा सके...इससे मुसलमान सड़कों पर चलते हुए भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं..."

जिहाद का गलत इस्तेमाल

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय शासी निकाय की बैठक में इसके अध्यक्ष, मौलाना महमूद मदनी ने कहा, "इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने 'जिहाद' को गाली, झगड़े और हिंसा का मतलब बना दिया है. लव जिहाद, लैंड जिहाद, 'तालीम' जिहाद, 'थूक' जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल मुसलमानों की आस्था का अपमान करने के लिए किया जाता है. यह दुख की बात है कि सरकार और मीडिया में ज़िम्मेदार लोगों को ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने में कोई शर्म नहीं आती... इस्लाम में, कुरान में 'जिहाद' का इस्तेमाल कई तरह से किया गया है. इसका इस्तेमाल किसी के फ़र्ज़, समाज और इंसानियत की भलाई के लिए किया गया है. जब इसका इस्तेमाल जंग के लिए किया गया है, तो इसका इस्तेमाल ज़ुल्म और हिंसा को खत्म करने के लिए किया गया है. इस्लिए जब जब ज़ुल्म होगा तब तब जिहाद होगा." 

वंदे मातरम पर सवाल

मौलाना महमूद मदनी ने कहा, "...'मुर्दा कौम' मुश्किलों में नहीं पड़ते. वे समर्पण कर देते हैं. उनसे वंदे मातरम पढ़ने को कहा जाएगा और वे तुरंत ऐसा करना शुरू कर देंगे. यही 'मुर्दा कौम' की पहचान है. अगर यह 'ज़िंदा कौम' है, तो हौसला बढ़ाना होगा और हालात का डटकर सामना करना होगा..."

सुप्रीम कोर्ट को लेकर ये कहा

मौलाना महमूद मदनी ने कहा, "...बाबरी मस्जिद, तीन तलाक और कई दूसरे मामलों में फैसले के बाद, ऐसा लगता है कि कोर्ट कुछ सालों से सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं...हमारे पास पहले भी कई ऐसे उदाहरण हैं जिनसे कोर्ट के चरित्र पर सवाल उठे हैं...सुप्रीम कोर्ट तभी सुप्रीम कहलाने के लायक है जब वह संविधान को माने और कानून को बनाए रखे. अगर वह ऐसा नहीं करता है, तो वह 'सुप्रीम' कहलाने के लायक नहीं है."

मौलाना महमूद मदनी ने कहा, "देश के संविधान ने हमें धर्म की आज़ादी का अधिकार दिया है. लेकिन धर्म बदलने के कानून के ज़रिए इस बुनियादी अधिकार को खत्म किया जा रहा है. इस कानून का इस्तेमाल इस तरह से किया जा रहा है कि किसी धर्म को मानने वाले को डर और सज़ा का सामना करना पड़ रहा है. दूसरी तरफ, 'घर वापसी' के नाम पर लोगों को किसी खास धर्म में शामिल करने वालों को खुली छूट है. उनसे कोई पूछताछ नहीं होती, और न ही उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई होती है..."

बीजेपी का पलटवार

मोहम्मद मदनी के बयान पर विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि "इस्लाम के बंदे तुम्हारी यूनिवर्सिटी में पड़कर बम बनाएं बेगुनाह लोगों को मारे. लव जिहाद करके हिंदू युवतियों को फसाए,फलों पर थूक कर हिंदू परिवारों को खिलाएं और आप चाहते हैं कि न्यायपालिका उनके पक्ष में फैसला दे. आपको उनकी तरफदारी करना है तो करिए लेकिन इस देश की न्यायपालिका सच के साथ खड़ी है. आपका हुक्मरानों ने जो बाबरनामा अकबरनामा लिखा है. उसी में उन्होंने खुद जिक्र किया है किस तरीके से भारत में आकर उन्होंने हिंदुओं के मंदिर तोड़े तो अगर हम अपने मंदिरों का अस्तित्व वापस ला रहे हैं और न्यायालय फैसला दे रहा है तो इसमें गलत क्या है, जिहाद को इस्लाम से इसलिए जोड़ा गया है. क्योंकि जब-जब कुछ गलत होता है तो आपके समाज के लोग ही उसमें शामिल होते हैं. अगर आप चाहते हैं कि इस्लाम बदनाम ना हो तो अपने बच्चे बच्चियों को शिक्षा दें कि वह लव जिहाद थूक जिहाद और लैंड जिहाद जैसे कारनामे करने से बचें."

शर्मा ने आगे कहा कि "यह भारत की न्यायपालिका ही है कि आप जैसे व्यक्ति को भारत में झेला जा रहा है, आपके पिताजी कहते हैं कि मुस्लिम समाज का लंदन में मेयर बन गया और भारत में कुछ नहीं बन पाए, वह इतिहास को दुरुस्त कर ले इस देश में राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर भी मुस्लिम समाज से आए एपीजे अब्दुल कलाम रहे हैं,अगर आप भी बेहतर काम करोगे तो भारत की जनता आपको सर आंखों आंखों पर बिठाएगी."

वहीं मौलाना मदनी के भोपाल में दिए बयान पर मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि "मौलाना मदनी हिंदुस्तान में रहना है तो वंदेमातरम कहना होगा. यह फिरकापरस्ती और देश को तोड़ने की बातें, इससे बहुत दिन राजनीति कर ली. संविधान और संवेधानिक व्यवस्था का मज़ाक उड़ाना, अब सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी करना, दुर्भाग्यपूर्ण है. मदनी भूल रहे है कि हिंदुस्तान में आज़ाद हिंदुस्तानी के रूप में रह रहे हैं तो संविधान का पालन करना होगा. खाते हिंदुस्तान की है लेकिन गाते किसी और की यह नहीं चलेगा. इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण कुछ भी नहीं. वंदेमातरम का असम्मान, संवेधानिक व्यवस्थाओं के खिलाफ जाकर बात करना, अब सहन नहीं किया जाएगा."

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