Madhya Pradesh News: सत्ता की हनक और रसूख का गुब्बारा उस वक्त पिचक गया जब मध्य प्रदेश के मऊगंज के भाजपा विधायक प्रदीप पटेल को उनकी ही जनता ने आइना दिखा दिया. एक विवादित जमीन के मामले में पक्षकार बने विधायक को ग्रामीणों के ऐसे उग्र विरोध का सामना करना पड़ा कि उन्हें अपनी जान बचाकर मौके से भागना पड़ा. हालात इतने बेकाबू थे कि अगर पुलिस ढाल न बनती, तो मंजर कुछ और ही होता.
धरने पर बैठे विधायक पर जनता का वार
हैरानी की बात यह है कि भाजपा विधायक प्रदीप पटेल यहां एक कांग्रेस नेता के लिए 'संकटमोचन' बनकर धरने पर बैठे थे. कड़कड़ाती ठंड में प्लास्टिक की पन्नी तानकर बैठे विधायक को शायद गुमान था कि जनता उनके इस 'त्याग' को सराहेगी, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विधायक जी जनसेवा नहीं, बल्कि भू-माफियाओं के खेल में पक्षपात कर रहे हैं.
आत्मदाह की कोशिश ने सुलगा दी चिंगारी
विवाद ने तब हिंसक मोड़ तब ले लिया लिया जब दूसरे पक्ष के लल्लू पाण्डेय को पुलिस ने विधायक के दबाव में थाने भेज दिया. इस एकतरफा कार्रवाई से भड़के परिजनों ने खुद को आग लगाने की कोशिश की. इसके बाद मऊगंज बायपास जंग का मैदान बन गया. ग्रामीणों ने विधायक को घेरकर सीधे सवाल दागा. कोर्ट के मामले में नेतागिरी क्यों?
विधायक को रूट डायवर्ट कर गया निकाला
भीड़ का पारा इतना हाई था कि विधायक प्रदीप पटेल को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी. 'मुर्दाबाद' के नारों के बीच ग्रामीणों ने साफ कह दिया कि हमारी जमीन से बाहर निकलो. घेराबंदी इतनी तगड़ी थी कि पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. पुलिसकर्मियों ने जैसे-तैसे मानव श्रृंखला बनाकर विधायक को भीड़ से खींचकर निकाला और उनकी गाड़ी तक पहुंचाया. विधायक के जाते ही ग्रामीणों ने उनकी गाड़ी को रोकने की भी कोशिश की, जिसे प्रत्यक्षदर्शियों ने 'विधायक की सरेआम फजीहत' करार दिया है. बड़े सवाल जो मऊगंज की सियासत में गूंज रहे हैं आखिर एक भाजपा विधायक को कांग्रेस नेता के लिए अपनी साख दांव पर क्यों लगानी पड़ी?
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