Millet Food Festival:  किताब में भगवान राम और मां सीता के लिए आपत्तिजनक बातें, बिक्री पर मंडला मिलेट फेस्टिवल में बवाल 

मिलेट फूड फेस्टिवल में पहुंचे मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी घटना को लेकर नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इस तरह की आपत्तिजनक पुस्तकों को समाज में नहीं आना चाहिए. किसी भी साहित्य को सार्वजनिक करने से पहले विशेषज्ञों और प्रोफेसरों द्वारा जांच की जानी चाहिए.

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मध्य प्रदेश के मंडला जिले में मिलेट फूड फेस्टिवल में आपत्तिजनक पुस्तक को लेकर बवाल हो गया. पुस्तक में हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी थीं. जानकारी लगते ही हिंदूवादी संगठनों के लोगों ने देर रात हंगामा शुरू कर दिया. सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता कोतवाली थाने पहुंचे और कार्रवाई की मांग की.  मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी घटना को लेकर नाराजगी व्यक्त की है.  

जानकारी के अनुसार, मंडला में आयोजित मिलेट फूड फेस्टिवल में लगे एक स्टॉल पर हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री वाली पुस्तक की बिक्री की जा रही थी. इस पुस्तक में भगवान राम, माता सीता, राजा दशरथ सहित अन्य देवी-देवताओं के संबंध में आपत्तिजनक बातें लिखी होने का आरोप लगाया गया. जैसे ही इसकी जानकारी हिंदूवादी संगठनों को लगी, बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मेले में पहुंचे और स्टॉल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.

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पुलिस ने दर्ज किया केस 

हिंदू संगठनों ने मेला प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किसकी अनुमति से इस तरह की पुस्तक की बिक्री की जा रही है. उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली सामग्री को बेचने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी. स्थिति बिगड़ती देख सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया. स्टॉल लगाने वाले दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई. इसके बाद सैकड़ों की संख्या में हिंदू संगठन के कार्यकर्ता कोतवाली थाने पहुंचे और नारेबाजी करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की. पुलिस ने देर रात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की. 

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आपत्तिजनक पुस्तक को समाज में नहीं आना चाहिए

मिलेट फूड फेस्टिवल में पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री व मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी घटना को लेकर नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इस तरह की आपत्तिजनक पुस्तकों को समाज में नहीं आना चाहिए. ऐसी पुस्तक को सुप्रीम कोर्ट पहले ही प्रतिबंधित कर चुका है. उन्होंने कहा कि किसी भी साहित्य को सार्वजनिक करने से पहले विशेषज्ञों और प्रोफेसरों द्वारा जांच की जानी चाहिए.  

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