Maihar School Construction Scam: मैहर जिले के रामनगर विकासखंड की 18 शासकीय स्कूलों (Maihar School Scam) में लघु निर्माण कार्यों (छोटे स्तर पर निर्माण कार्य) के नाम पर 4.37 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान लेने के बाद अब ठेकेदारों द्वारा नियमों के विपरीत निर्माण कार्य कराने की कोशिश शुरू कर दी गई है. ठेकेदारों ने स्कूल परिसरों में पोस्टर लगाकर यह चेतावनी दी है कि यदि काम रोका गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी. हैरानी की बात यह है कि यह सब उस समय किया जा रहा है, जब मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच प्रक्रिया जारी है. ऐसे में इसे सबूतों से छेड़छाड़ की गंभीर कोशिश माना जा रहा है.

Maihar School Scam: स्कूल के बाहर लगा पोस्टर
किन कार्यों के लिए किया गया था भुगतान?
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मैहर जिले के 18 स्कूलों को छत मरम्मत, विद्यालय में नए गेट और खिड़कियां लगाने, पुताई, बाउंड्रीवाल की मरम्मत एवं पुताई, कमरों की मरम्मत तथा साइकिल स्टैंड निर्माण के लिए अलग-अलग राशि स्वीकृत की गई थी. इन कार्यों के लिए भोपाल स्थित वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर, रुद्र इंटरप्राइजेज और महाकाल ट्रेडर्स के नाम पर भुगतान किया गया. भुगतान के बाद भी लंबे समय तक स्कूलों में किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं कराया गया.

Maihar School Scam: स्कूल के बाहर काम करता मजदूर
जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
मामले का खुलासा होने पर कलेक्टर मैहर के निर्देश पर एसडीएम रामनगर द्वारा जांच कराई गई. जांच के दौरान यह सामने आया कि जिन स्कूलों के नाम पर भुगतान जारी किया गया था, वहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं हुआ है. न तो छतों की मरम्मत मिली, न गेट-खिड़कियों का उन्नयन और न ही अन्य स्वीकृत कार्यों के प्रमाण. इसके बाद रामनगर थाने में 18 स्कूलों के प्राचार्यों, बाबू सह भृत्य और तीनों फर्मों के प्रोपराइटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.

Maihar School Scam: स्कूल के अंदर काम करते हुए मजदूर
सबूत मिटाने की कोशिश, निर्माण कार्य शुरू
अब जब मामला पुलिस जांच के दायरे में है, तो ठेकेदारों द्वारा अचानक निर्माण कार्य शुरू कराना सवाल खड़े कर रहा है. बताया जा रहा है कि तीनों ठेका कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद उनके अघोषित मालिक विजय सिंह ठाकुर रामनगर क्षेत्र में सक्रिय होकर स्कूलों में निर्माण कार्य करवा रहे हैं, ताकि यह दिखाया जा सके कि कार्य पहले ही कराया जा चुका था. इससे साफ है कि जांच को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ की मंशा है.
प्राचार्य की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रयास में स्कूल प्राचार्य भी कोई आपत्ति दर्ज नहीं करा रहे हैं, जिससे ठेकेदारों की कोशिशों को बल मिल रहा है. कई स्कूलों में न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही विभागीय स्तर पर विरोध दर्ज कराया गया.
डीईओ ने माना सबूतों से छेड़छाड़
जिला शिक्षा अधिकारी गिरीश अग्निहोत्री ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश है. उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पूर्व में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई थी, जिसमें किसी भी स्कूल में निर्माण कार्य नहीं पाया गया. ऐसे में अब काम कराया जाना पूरी तरह अनुचित है. डीईओ ने कहा कि संबंधित प्राचार्यों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे थाने में शिकायत दर्ज कराएं और निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए.
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