Singrauli News MP: 'खाट' पर सरकारी व्यवस्था! एंबुलेंस नहीं मिली तो शव को लेकर पैदल चले परिजन

पोस्टमॉटर्म के लिए शव को अस्पताल पहुंचाना था. इसके लिए परिजनों ने सरकारी एम्बुलेंस की भी गुहार लगाई थी लेकिन उनकी मांग को दरकिनार कर दिया गया. जिसके बाद परिजन शव को पोस्टमार्टम के लिए खाट पर शव को लेकर चल दिए. परिजनों ने शव को लेकर इसी तरह करीब 1 किलोमीटर का सफर तय किया जिसके बाद ट्रेक्टर का इंतजाम किया गया.

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Singrauli News MP: 'खाट' पर सरकारी व्यवस्था! एंबुलेंस नहीं मिली तो शव को लेकर पैदल चले परिजन

MP Latest News: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सिंगरौली (Signrauli) जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. यहां पर एक व्यक्ति की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए एम्बुलेंस नहीं मिली. जिसके चलते शव को खाट के सहारे लेकर जाना पड़ा. मृतक के परिजन करीब एक किलोमीटर तक शव को लेकर ऐसे ही ढोते रहे. गांव से निकलने के बाद परिजनों ने शव ले जाने के लिए ट्रैक्टर का इंतज़ाम किया. करीब 4000 रुपये किराया देकर परिजन शव के पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल पहुंचें. मृतक की पहचान आदिवासी के रूप में हुई है, जिसकी कुएं में गिरने की वजह से मौत हो गई. 

जानिए कब की है घटना? 

घटना सोमवार को जिला मुख्यालय सिंगरौली के साजाबार (रौहाल ) गांव की है. शिवकुमार सिंह (38) की कुएं में गिरने से मौत हो गई. पोस्टमॉटर्म के लिए शव को अस्पताल पहुंचाना था. इसके लिए परिजनों ने सरकारी एम्बुलेंस की भी गुहार लगाई थी लेकिन उनकी मांग को दरकिनार कर दिया गया. जिसके बाद परिजन शव को पोस्टमार्टम के लिए खाट पर शव को लेकर चल दिए. परिजनों ने शव को लेकर इसी तरह करीब 1 किलोमीटर का सफर तय किया जिसके बाद ट्रेक्टर का इंतजाम किया गया और करीब 4000 रुपये किराया देकर परिजन पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल पहुंचे. 

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एक तरफ जहां प्रदेश सरकार और चिकित्सा विभाग सुविधा देने के तमाम वादे करता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सिंगरौली ज़िले से स्वास्थ्य महकमे की पोल खोलती तस्वीर साफ़ नज़र आ रही है. बताया जा रहा है कि मृतक के परिजनों ने सरकारी एम्बुलेंस के लिए गुहार लगाई लेकिन उन्हें नसीब नहीं हुई. जिसके बाद बेसहारा परिजन खाट पर शव लेकर निकल पड़े और जैसे-तैसे शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल पहुंचाया. प्रदेश की उर्जाधानी के नाम से जाने जानी वाली सिंगरौली ज़िले से इस तरह की तस्वीर सामने निकल कर आई है. यह तस्वीर सरकार के विकास के दावों को आईना दिखाने वाली है...लेकिन न तो सरकार और न ही चिकित्सा प्रशासन को कोई सरोकार है. 

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