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This Article is From Jan 31, 2026

PDS Rice: एमपी में गरीबों के हक़ का 48 हजार क्विंटल चावल सड़ गया, दो साल तक सोता रहा सिस्टम

वर्ष 2023–24 में जिले की पांच राइस मिलों से मिलिंग के बाद यह चावल नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में जमा कराया गया था. जांच में पाया गया कि चावल की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी. इसके बावजूद उसे भंडारण की अनुमति दे दी गई. यह चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाना था, लेकिन ऐन समय पर गुणवत्ता पर सवाल उठने से वितरण रोक दिया गया.

PDS Rice: एमपी में गरीबों के हक़ का 48 हजार क्विंटल चावल सड़ गया, दो साल तक सोता रहा सिस्टम

MP PDS Rice: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के आदिवासी बहुल डिंडोरी (Dindori) जिले से सरकारी लापरवाही की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए रखे गए हजारों क्विंटल चावल समय पर वितरण और उचित निगरानी के अभाव में गोदामों में सड़कर पूरी तरह खराब हो गया. 

बताया जा रहा है कि करीब 47,979 क्विंटल चावल, जिसकी कीमत लगभग 27 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, अब उपयोग के लायक तक नहीं बचा है. 

नियमों को ताक पर रखकर हुआ भंडारण

वर्ष 2023–24 में जिले की पांच राइस मिलों से मिलिंग के बाद यह चावल नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में जमा कराया गया था. जांच में पाया गया कि चावल की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी. इसके बावजूद उसे भंडारण की अनुमति दे दी गई. यह चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाना था, लेकिन ऐन समय पर गुणवत्ता पर सवाल उठने से वितरण रोक दिया गया.

दो साल तक चलता रहा कागज़ी खेल

मामले के सामने आने के बाद नोटिस और पत्राचार का सिलसिला शुरू हुआ, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. परिणाम यह हुआ कि खराब गुणवत्ता वाला चावल दो वर्षों तक गोदामों में पड़ा रहा और अंततः पूरी तरह सड़ गया. अब स्थिति ऐसी है कि इसे हटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. वेयरहाउसिंग विभाग के जिला प्रबंधक ने स्वीकार किया है कि इस मामले में गोदाम प्रबंधन, खाद्य विभाग और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही रही है. वहीं, कुछ राइस मिल संचालकों ने गोदामों में रखरखाव की कमी को कारण बताया है.

मिलर्स की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

जानकारी के अनुसार पांच में से केवल दो मिलर्स ने खराब चावल वापस लेकर नया चावल देने की सहमति जताई है. बाकी मिलर्स की ओर से अभी तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है. इससे यह सवाल उठ रहा है कि जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी होगी.

प्रशासन ने मांगी सख़्त कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अंजू पवन सिंह भदौरिया ने संबंधित राइस मिलर्स और गोदाम संचालकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और नुकसान की वसूली के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है. प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई अब राज्य शासन के निर्णय पर निर्भर करेगी.

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करोड़ों रुपये के अनाज के नुकसान ने सरकारी निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दो वर्षों तक चली ढिलाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाएं दोबारा भी हो सकती हैं. अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों पर वास्तव में सख़्त कार्रवाई होती है या यह प्रकरण भी कागज़ी कार्यवाही तक सीमित रह जाता है.

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