Women Reservation Bill Lok Sabha: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है. इस पूरे घटनाक्रम पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए और इसे महिलाओं के अधिकारों के प्रति असंवेदनशीलता करार दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे अहम मुद्दे पर राजनीतिक विरोध अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. इस बीच, सरकार को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और मामला अब देश की जनता, खासकर महिला मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है.
महिला आरक्षण बिल गिरने पर सीएम मोहन यादव का कांग्रेस पर हमला
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल के पारित न होने को लेकर कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि कांग्रेस की “महिला विरोधी मानसिकता” एक बार फिर उजागर हो गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विधेयक को संसद में गिरने देना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है. डॉ. यादव ने अपने बयान में कहा कि यह घटनाक्रम देश की माताओं और बहनों के अधिकारों और सम्मान के प्रति विपक्ष की असंवेदनशीलता को दिखाता है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे विषय पर राजनीति करना उचित नहीं है.
कांग्रेस की महिला विरोधी मानसिकता आज एक बार फिर उजागर हुई है। संसद में महिला सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक को पास न होने देना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) April 17, 2026
यह देश की माताओं-बहनों के अधिकारों और सम्मान के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। जनता सब देख रही है और इसका…
“जनता सब देख रही है” : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भी लिखा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब जरूर देगी. उनके अनुसार, महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे पर किसी तरह की चालबाजी लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नारा नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक जिम्मेदारी है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए.
लोकसभा में गिरी महिला आरक्षण से जुड़ी संशोधन प्रक्रिया
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं दिला सकी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को बताया कि मत विभाजन के दौरान बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े. संविधान संशोधन के लिए आवश्यक बहुमत पूरे न होने के कारण यह विधेयक विचार के स्तर पर ही गिर गया. अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संशोधन विधेयक के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में हासिल नहीं हो सका.
अन्य विधेयकों पर भी नहीं बढ़ी कार्यवाही
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में बताया कि महिला आरक्षण से जुड़े बिल के गिरने के बाद दो अन्य विधेयकों पर भी आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी. विपक्ष के विरोध के बाद संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर मत विभाजन के जरिए मतदान कराया गया, लेकिन सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रही.
अमित शाह का विपक्ष पर तीखा वार
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष, खासकर कांग्रेस और इंडिया महागठबंधन पर बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस ने जो प्रस्ताव रखा, वह एक सुनियोजित जाल है, जिससे महिला आरक्षण को 2029 से पहले लागू न होने दिया जाए.
अमित शाह ने कहा कि अगर विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में वोट नहीं देता है तो यह बिल गिर जाएगा, और देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को मान्यता नहीं देता और इसके बावजूद इंडिया महागठबंधन तुष्टिकरण की राजनीति के तहत मुस्लिम आरक्षण की मांग कर रहा है.
सियासी संग्राम तेज, महिलाओं की निगाहें संसद पर
महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. जहां सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की साजिश बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार पर दोष मढ़ रहा है. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर महिला सशक्तिकरण को लेकर दलों के रुख और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब यह मुद्दा संसद से बाहर जनता, खासकर देश की महिलाओं के बीच अहम राजनीतिक बहस बनता जा रहा है.
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