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Lok Sabha Elections: 'सड़क की सुविधा नहीं तो क्यों दें वोट', परेशान ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार का ऐलान

Election Boycott in Betul: बैतूल के इस गांव में लोगों के पास सड़क की सुविधा नहीं है. पिछले 20 साल से नेता इस इलाके में सिर्फ वादे करते हैं, लेकिन काम नहीं करते. इसको लेकर यहां के लोगों ने चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला लिया है.

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Lok Sabha Elections: 'सड़क की सुविधा नहीं तो क्यों दें वोट', परेशान ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार का ऐलान
इस गांव के लोगों को अब तक नहीं मिली है सड़क की सुविधा

Betul News: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बैतूल जिले के एक गांव के लोगों ने विकास कार्य (Development Works) नहीं होने के कारण लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. गांव के बाहर पोस्टर और बैनर लगा कर लोगों ने नेताओं को गांव के अंदर चुनाव प्रचार के लिए प्रवेश से भी रोक दिया. इस तरह के चुनाव बहिष्कार से जुड़े कई मामले पूरे प्रदेश से सामने आए है. घुटिगढ़ गांव के लोगों का कहना है कि जब हमारे पास रोड ही नहीं है तो हम वोट क्यों दें. हर बार वादा किया जाता है, लेकिन काम अब तक किसी ने नहीं किया है. बता दें कि इस सीट पर 7 मई को मतदान होना है.

मतदान न करने की दी धमकी

घुटिगढ़ गांव के लोगों ने इस लोकसभा चुनाव में मतदान न करने की धमकी दी है. उनका कहना है कि गांव में अच्छी सड़क नहीं है. नतीजा ये है कि लोगों ने लोकसभा चुनाव में वोटिंग का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. दरअसल, यह पूरा मामला बैतूल जिले की ताप्ती तट पर बसे घुटिगढ़ गांव का है, जहां करीब 700 ग्रामीण रहते हैं. यह गांव जिला मुख्यालय से महज 24 किलोमीटर दूर हैं, लेकिन घुटिगढ गांव विकास कार्यों से आज भी कोसों दूर हैं. लोगों की मानें तो वह तकरीबन 20 वर्षों से सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से महरूम है. स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और अस्पताल जाने वाली गर्भवती महिलाओं को बारिश के दिनों में इसी कीचड़ युक्त रास्ते से गुजरना पड़ता है.

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बारिश में गायब हो जाती है सड़क

ताप्ती नदी से लगे इस गांव की सड़कें बारिश में पूरी तरह डूब जाती हैं और पहाड़ी इलाका होने की वजह से कच्ची सड़क पर अक्सर एक्सीडेंट होते रहते हैं. ग्रामीणों की माने तो चुनाव के दौरान गांव में नेता आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं. लेकिन, अधिकारियों ने तो अब तक इस मामले की सुध तक नहीं ली है. लिहाजा, ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विकास कार्य नहीं हुआ तो मताधिकार का उपयोग क्यों करें. ग्रामीणों ने चुनाव के दौरान नेताओं के गांव में आने पर भी प्रतिबंध लगा रखा है और चुनाव का बहिष्कार कर दिया है.

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