MP News: कलेक्टर से किसान ने कहा- “साहब, मैं जीवित हूं... कहिए तो मरकर दिखाऊं”; जानें मामला  

कटनी कलेक्ट्रेट में एक किसान ने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड में उन्हें मृत बताकर धान बिक्री रोकी गई. जांच में कलेक्टर आशीष तिवारी ने स्पष्ट किया कि पंजीयन किसान के नाम पर नहीं, बल्कि उनके दिवंगत दादा के नाम पर कराया गया था. किसान को मृत घोषित नहीं किया गया, बल्कि पंजीयन में गलती सामने आई.

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जांच में किसान की गलती आई सामने.

कटनी कलेक्ट्रेट कार्यालय में उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब एक किसान खुद के जीवित होने का सबूत देने के लिए कलेक्टर के पास पहुंचा. रीठी तहसील अंतर्गत गुरजीकला गांव निवासी किसान रामभरण विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें ‘मृत' घोषित कर दिया गया है, जिसके कारण वह अपनी धान की फसल नहीं बेच पा रहे हैं.

दरअसल, किसान रामभरण विश्वकर्मा कलेक्टर आशीष तिवारी के पास अपनी फरियाद लेकर पहुंचे. इस दौरान किसान ने कहा कि उन्हें समर्थन मूल्य पर 250 क्विंटल धान बेचनी है, जिसके लिए उन्होंने बाकायदा पंजीयन कराया था, लेकिन ग्राम पंचायत के रोजगार सचिव की कथित लापरवाही के कारण उनकी समग्र आईडी में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है.

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पंजीयन पोर्टल पर खुद को मृत देखकर हताश किसान ने कलेक्टर के सामने भावुक होते हुए कहा- “साहब, मैं जीवित हूं. कहिए तो मरकर दिखाऊं.” किसान के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया.

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कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर आशीष तिवारी ने तत्काल संज्ञान लिया. मामले की शुरुआती जांच के बाद कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने किसान के दावों को सिरे से खारिज कर दिया. जांच में पाया गया कि किसान रामभरण विश्वकर्मा ने जो धान का पंजीयन कराया था, वह उनके नाम पर नहीं बल्कि उनके दादा रामनाथ बढ़ई के नाम पर था. रिकॉर्ड के अनुसार रामनाथ बढ़ई की वास्तव में मृत्यु हो चुकी है. चूंकि पंजीयन मृतक के नाम पर था, इसलिए उसे स्वीकार नहीं किया गया. रामभरण विश्वकर्मा को व्यक्तिगत रूप से मृत घोषित नहीं किया गया है, बल्कि उनकी अपनी गलती के कारण उन्होंने अपने दादा के नाम पर पंजीयन कराया था. इस कारण ये गड़बड़ हुई है. 

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