67 की उम्र में सीखी थी कला की हुनर! 82 में पद्मश्री से सम्मानित, MP के बैगा चित्रकार कैसे बनाई दुनिया में पहचान?

Jodhaiya Bai Baiga Passes Away: 67 साल की उम्र में जब जोधइया बाई बैगा के पति दुनिया को छोड़कर चले गए तो उनके दिमाग में चित्रकारी का ख्याल आया. जिसके बाद उन्होंने कला की ओर रुख किया और चित्रकारी सीखी.

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Jodhaiya Bai Baiga Death: पद्मश्री से सम्मानित बैगा चित्रकार जोधइया बाई बैगा (Jodhiya Bai Baiga) का 86 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने रविवार को अपने गांव लोढ़ा में अंतिम सांस ली. कई दिनों से जोधइया बाई बीमार चल रही थी. जोधइया बाई एक ऐसी आदिवासी महिला थी, जिन्होंने 67 वर्ष की आयु में कला की ओर रुख किया और कला को इंटरनेशनल पहचान दिलाई. जोधइया बाई बैगा मध्य प्रदेश की बैगा जनजाति से ताल्लुक रखती हैं और वह उमरिया जिले के लोढ़ा गांव की रहने वाली हैं.

जोधइया काफी बड़ी उम्र में चित्रकारी सीख कर दुनियाभर में प्रसिद्ध पाई. साथ ही कला के क्षेत्र में अद्भुत कार्य किया.

67 साल की उम्र में सीखी चित्रकारी

जोधइया बाई बैगा लकड़ियां और गोबर बेचकर घर चलाने में पति की मदद करती थीं. उनके पति एक मजदूर थे. हालांकि जब उम्र के एक पड़ाव के बीत जाने के बाद उन्होंने चित्रकारी सीखी. दरअसल, 67 साल की उम्र में जब उनके पति दुनिया को छोड़कर चले गए तो जोधइया बाई बैगा के दिमाग में चित्रकारी का ख्याल आया और उन्होंने कला की ओर रुख किया और चित्रकारी सीखी.

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Jodhaiya Bai Baiga: 67 साल की उम्र में जोधइया सीखी थीं चित्रकारी.

फर्श से सीखी थीं चित्रकारी

जोधइया पहले फर्श पर रंगोली बनानी सीखी. इसके बाद सब्जियों पर चित्रकारी की और बाद में लकड़ी पर अपनी कला को उभारा. फिर जोधइया हैंडमेड पेपर और कैनवास पर चित्रकारी करनी शुरू की. 

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पद्म श्री पुरस्कार से किया गया था सम्मानित

ऐसे जोधइया बाई बैगा जनजाति की कला को फिर से जीवित कर दिया और इस चित्रकारी की पहचान देश दुनिया में होने लगी. साल 2019 में जोधइया की पेंटिंग को इटली के शोकेस में रखा गया था. वहीं 22 मार्च, 2023 को जोधइया बाई बैगा को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कला के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था. इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 8 मार्च, 2022 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया था. जोधइया को यह पुरस्कार महिला सशक्तिकरण की दिशा में असाधारण कार्य के लिए दिया गया था. 

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