उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचीं जया किशोरी, नंदी हॉल में किया शिव जाप

Jaya Kishori Mahakal Darshan: उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रसिद्ध कथा वाचक जया किशोरी ने शनिवार को बाबा महाकाल के दर्शन किए. उन्होंने नंदी हॉल में शिव जाप किया और भस्म आरती को विशेष बताया.

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श्री महाकालेश्वर मंदिर में पूजा करतीं जया किशोरी

Jaya Kishori Mahakal Darshan: मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर (Mahakal Mandir Ujjain) में शनिवार को प्रसिद्ध कथा वाचक जया किशोरी (Jaya Kishori) ने बाबा महाकाल के दर्शन किए. इस दौरान उन्होंने विधि‑विधान से पूजन कर आशीर्वाद लिया और कहा कि बाबा महाकाल के दर्शन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है. पूजन के पश्चात श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से जया किशोरी का स्वागत और सम्मान किया गया. वहीं चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली. देश‑विदेश से आए श्रद्धालु शुक्रवार देर रात से ही बाबा के दर्शन के लिए लंबी कतार में लगे रहे.

Jaya Kishori Mahakal Darshan: महाकाल मंदिर में जया किशोरी

नंदी हॉल में बैठकर किया शिव जाप

बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर में लगातार देश‑विदेश की ख्यात हस्तियां दर्शन के लिए पहुंच रही हैं. इसी कड़ी में शनिवार को जया किशोरी मंदिर पहुंचीं. उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर भगवान शिव का जाप किया और नंदी महाराज का विधि‑विधान से पूजन किया. इसके बाद बाबा महाकाल को जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया.

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“बार‑बार दर्शन की अभिलाषा है” : जया किशोरी

पूजा के बाद जया किशोरी ने कहा कि वह पहले भी भस्म आरती में शामिल हो चुकी हैं और आगे भी बार‑बार बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल से सभी पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की है. इस दौरान उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की भी सराहना की.

शनिवार की भस्म आरती रही विशेष, चांदी के त्रिपुंड और फूलों से सजा बाबा महाकाल

मंदिर परिसर का दृश्य अत्यंत मनोहारी था. भक्त बाबा महाकाल की झलक पाकर ‘हर‑हर महादेव' के जयकारे लगा रहे थे. शनिवार को रोजाना की तरह सुबह 4 बजे भस्म आरती संपन्न कराई गई. शनिवार की भस्म आरती विशेष रही. बाबा महाकाल ने आरती के बाद हुए श्रृंगार में मस्तक पर ॐ के साथ भक्तों को दर्शन दिए. बाबा के माथे पर बना ॐ शांति का प्रतीक है, जो पूरे विश्व को शांति का संदेश देता है.

नियमों के अनुसार हुआ अभिषेक और श्रृंगार

भस्म आरती के नियमों के तहत सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा का जलाभिषेक किया गया, इसके बाद पंचामृत से स्नान कराया गया. पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और फलों के रस शामिल थे. अभिषेक के बाद बाबा को भस्म अर्पित कर आरती की गई. इसके पश्चात विशेष श्रृंगार में बाबा के मस्तक पर ॐ, मुकुट और चांदी का सुंदर त्रिपुंड लगाया गया. फूलों की मालाएं, बेलपत्र और चंदन से बाबा का अलौकिक श्रृंगार किया गया. श्रृंगार पूर्ण होने के बाद कपूर आरती और भोग अर्पित किया गया.

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