अंगूर के दाम आधे, सेब और कीवी बाजार में नहीं, फलों पर भी पड़ा अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग का असर 

फल व्यापारियों का कहना है कि अगर, जल्द ही युद्ध की स्थिति सामान्य होती है, तो निर्यात फिर शुरू हो सकेगा और उन्हें बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है. फिलहाल, मंडी में मंदी का माहौल है. इससे साफ है कि युद्ध का असर आम जनजीवन और स्थानीय कारोबार को हर तरह से प्रभावित कर रहा है.

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अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का असर स्थानीय बाजारों में साफ दिखाई दे रहा है. इसके असर से जबलपुर की थोक फल मंडी में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है. निर्यात-आयात पर पड़े असर ने फल कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे व्यापारी और किसान दोनों चिंतित हैं.

दरअसल, भारत से बाहर भेजे जाने वाले फलों का निर्यात अचानक रुक गया है. इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है. खासतौर पर अंगूर के दाम आधे रह गए हैं. पिछले साल जहां अंगूर 100 से 110 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा था, जो अब थोक मंडी में 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. कीमतों में आई इस भारी गिरावट के चलते व्यापारियों ने सप्लाई भी कम कर दी है.

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सेब और कीवी नहीं मिल रहे  

वहीं दूसरी ओर, ईरान और तुर्की से आयात होने वाले फल जैसे सेब और कीवी अब बाजार में या तो उपलब्ध नहीं हैं या फिर बेहद महंगे हो गए हैं. आयात प्रभावित होने से इन फलों की आमद लगभग थम गई है, जिससे मंडी में उनकी कमी साफ दिखाई दे रही है.

आम का निर्यात भी रुका 

आम के कारोबार पर भी इसका असर पड़ा है. कई जगहों पर आम का निर्यात रुक जाने से फसल बगीचों में ही पड़ी हुई है. किसानों को उचित दाम नहीं मिल पाने के कारण वे अभी बाजार में माल उतारने से बच रहे हैं.

तो बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद 

फल व्यापारियों का कहना है कि अगर, जल्द ही युद्ध की स्थिति सामान्य होती है, तो निर्यात फिर शुरू हो सकेगा और उन्हें बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है. फिलहाल, मंडी में मंदी का माहौल है. इससे साफ है कि युद्ध का असर आम जनजीवन और स्थानीय कारोबार को हर तरह से प्रभावित कर रहा है. इससे हर कोई हालात सुधरने का इंतजार कर रहा है.

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