
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) जबलपुर चैप्टर के 2024-25 के चुनावों में विवाद गहराता जा रहा है. निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. सुनील बहल ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए. जस्टिस विशाल घगट ने इस पर सुनवाई करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगा दी और चार हफ्तों के भीतर अगली सुनवाई का समय निर्धारित किया.
वार्षिक चुनाव पर कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी
IMA के 1390 पंजीकृत चिकित्सकों में विवाद इस बात पर है कि निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. बहल का चुनाव मान्य है या नहीं. दूसरी तरफ वर्तमान अध्यक्ष डॉ. अभिजीत विश्नोई ने कहा कि IMA के संविधान में निर्वाचित अध्यक्ष का पद नहीं है और डॉ. बहल जबलपुर से बाहर पदस्थ हैं, जो नियमों का उल्लंघन है. अब अंतिम फैसला कोर्ट करेगा.
डॉ. सुनील बहल को चुना गया था निर्वाचित अध्यक्ष
IMA जबलपुर में लगभग 1390 पंजीकृत चिकित्सक हैं और वर्ष 2016 से ही निर्वाचित अध्यक्ष की परंपरा चलती आ रही है. आमतौर पर यह चुनाव कार्यकाल की समाप्ति से पहले ही संपन्न हो जाता है. इस वर्ष डॉ. सुनील बहल को निर्वाचित अध्यक्ष चुना गया था, लेकिन कुछ चिकित्सकों के एक गुट ने इस चुनाव को मानने से इनकार कर दिया और नए चुनाव की मांग कर दी.
दो गुटों में बंटा IMA जबलपुर चैप्टर का चुनाव
इस विवाद ने IMA को दो स्पष्ट गुटों में बांट दिया. एक गुट की ओर से डॉ. अमिता सक्सेना ने नामांकन भरा, जबकि दूसरे गुट की ओर से डॉ. ऋचा शर्मा चुनावी मैदान में उतरीं. लेकिन चुनाव की तारीख नजदीक आते ही डॉ. सुनील बहल ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की. कोर्ट ने इस मामले पर स्टे जारी करते हुए स्थिति को जस का तस बनाए रखने का आदेश दिया.
एनडीटीवी से बात करते हुए डॉ. बहल ने कहा, 'IMA जबलपुर में निर्वाचित अध्यक्ष का कार्यकाल संभालना एक पुरानी परंपरा है, जिसे इस बार तोड़ने की कोशिश की गई. हमने कोर्ट का रुख किया और कोर्ट ने हमारे पक्ष में स्टे जारी किया है.'
विश्नोई ने चुनाव प्रक्रिया में खामियां को लेकर लगाया आरोप
वहीं IMA जबलपुर के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. अभिजीत विश्नोई ने बताया कि IMA के संविधान में निर्वाचित अध्यक्ष का कोई संवैधानिक पद नहीं है. डॉ. सुनील बहल जबलपुर के बाहर मंडला में पदस्थ हैं, जो कि IMA के नियमों के खिलाफ है. IMA का अध्यक्ष स्थानीय होना चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में कई खामियां थीं, जिन्हें नजरअंदाज करते हुए डॉ. सुनील बहल को निर्वाचित घोषित कर दिया गया.
अब मामला कोर्ट में है.अंतिम निर्णय न्यायालय ही करेगा, जिसे सभी गुट मानने के लिए बाध्य होंगे. इस विवाद ने IMA के अंदर गुटबाजी को उजागर कर दिया हैऔर इससे संगठन के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
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