राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी, NHRC) ने गुरुवार को इंदौर जिले के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से लोगों की मौत मामले में एक्शन लिया है. एनएचआरसी ने इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है. आयोग ने कहा कि ऐसी खबरें हैं कि स्थानीय लोग कई दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई.
आयोग ने उन खबरों का स्वतः संज्ञान लिया है, जिनमें कहा गया है कि दूषित पानी पीने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और 40 से अधिक लोग बीमार पड़ गए.
मुख्य सचिव को दिया नोटिस
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार, प्रारंभिक आकलन से पता चला है कि लीकेज के कारण नाले का पानी पेयजल पाइपलाइन में घुस गया, जिससे भागीरथपुरा क्षेत्र में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैल गया. आयोग ने पाया कि यह पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मुद्दा है. इसलिए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है.
स्थानीय लोगों का दावा है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से बीमार पड़ने के बाद पिछले एक सप्ताह में छह महिलाओं समेत कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई है.
सीएम ने मुआवजा देने की घोषणा की
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार सभी मरीजों के इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी.