Gwalior Rabies Death: ग्वालियर शहर में आवारा कुत्तों का खतरा अब गंभीर रूप लेता जा रहा है. शहर में लगातार डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं और अब ये मामले लोगों की जान तक ले रहे हैं. बीती रात रेबीज से एक और व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई. पिछले 25 दिनों में यह रेबीज से तीसरी मौत है, जबकि बीते तीन महीनों में कुल सात लोगों की जान जा चुकी है. हालात इतने भयावह हैं कि लोग अब अपने ही घरों और रास्तों पर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
महाडिक की गोठ निवासी युवक की गई जान
बीती रात महाडिक की गोठ निवासी 36 वर्षीय राजू कुशवाह की रेबीज के कारण मौत हो गई. परिजनों के मुताबिक, करीब 25 दिन पहले राजू को एक आवारा कुत्ते ने उंगली में काट लिया था. उस समय परिजनों ने इसे हल्के में लिया और एंटी‑रेबीज इंजेक्शन नहीं लगवाया गया.
लापरवाही बनी मौत की वजह
कुत्ते के काटने के बाद राजू को सिर्फ टिटनेस का इंजेक्शन लगवाया गया. समय पर रेबीज का टीका न लगने के कारण धीरे‑धीरे उसकी हालत बिगड़ने लगी. कुछ दिनों बाद उसे पानी से डर लगने लगा, जो रेबीज का बड़ा लक्षण माना जाता है.
अस्पताल पहुंचने में हो गई देर
राजू की तबियत ज्यादा बिगड़ने पर 28 अप्रैल को उसे ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने इलाज की पूरी कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. करीब पांच दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद शनिवार को उसकी मौत हो गई.
तीन महीने में सात मौतें, हालात चिंताजनक
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बीते दो माह 24 दिनों में रेबीज से सात लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें ग्वालियर, टीकमगढ़, दतिया, छतरपुर, सबलगढ़ और उपनगर मुरार के लोग शामिल हैं. मृतकों में 6 साल के बच्चे से लेकर 65 वर्षीय बुजुर्ग तक शामिल हैं.
सीएमएचओ ने दी चेतावनी
सीएमएचओ डॉ. सचिन श्रीवास्तव का कहना है कि डॉग बाइट के मामलों में लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है. उन्होंने साफ कहा कि रेबीज से होने वाली मौतें समय पर एंटी‑रेबीज इंजेक्शन और पूरे डोज न लेने की वजह से होती हैं. कुत्ते के काटने के बाद तुरंत अस्पताल जाकर सभी डोज समय पर लगवाना जरूरी है.
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर चिंता
गजराराजा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आरके धाकड़ ने कहा कि शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या गंभीर चिंता का विषय है. उनका कहना है कि सिर्फ इलाज पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डॉग बाइट की घटनाएं रोकने के लिए संबंधित विभागों को ठोस और व्यापक कदम उठाने होंगे.