इंदौर के बाद अब ग्वालियर में नल से जहर! पानी के 27 सैंपल में सीवर समेत 33 तरह के बैक्टीरिया मिले, जानिए क्या पी रहे आप

Gwalior Water Quality: ग्वालियर में नगर निगम की जांच में पानी के 27 सैंपल में 33 तरह के बैक्टीरिया मिले हैं. कई जगह पानी में सीवर का पानी भी मिल रहा है. अब निगम के अफसरों ने पेयजल के 27 सैंपल जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला पीएचई की एनएबीएल अधिकृत लैब को बैक्टीरियल जांच के लिए भेजे हैं.

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MP Water Quality: मध्य प्रदेश के इंदौर में गंदा पानी पीने से दर्जनों मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के बाद अब ग्वालियर में भी पानी की यही तस्वीर सामने आ रही है. नगर निगम ने शहर में अलग-अलग जगहों से पानी के  सैंपल लिए, जिनकी जांच में 27 सैंपल में 33 तरह के बैक्टीरिया मिले हैं. साथ ही 56 स्थानों पर सीवर और पेयजल लाइन एक-दूसरे से मिली हुई पाई गईं, जहां क्रैक होने से पेयजल में सीवरयुक्त पानी सप्लाई हो रहा है. 

चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 125 साल पुरानी ग्वालियर नगर निगम के पास पानी की शुद्धता जांचने के लिए अपनी लैब तक नहीं है. लोग घरों में मीटर लगाकर पानी का टीडीएस चेक करते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं. नलों से आ रहा गंदा पानी पीने के कारण लोगों को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ रही है. शहर में रहने वाले एक युवक की हालत इतनी खराब हो गई उसे दिल्ली एम्स में भर्ती होना पड़ा. 

युवक को एम्स में भर्ती होना पड़ा 

दरअसल, इंदौर कांड के बाद ग्वालियर में भी लोग गंदे और सीवरयुक्त पानी को लेकर भयभीत हैं. कई लोग बीमार भी हुए हैं. एक युवक को तो इलाज के लिए दिल्ली एम्स में भर्ती कराना पड़ा. ग्वालियर शहर में पानी की साफ है, इसका खुलासा खुद नगर निगम की जांच में हो गया है. इंदौर की घटना के बाद शहर के अलग-अलग स्थानों से पानी के सैंपल लिए गए थे. पहली जांच रिपोर्ट में सीवरयुक्त पानी घरों तक पहुंचने के प्रमाण मिले हैं. प्रयोगशाला में पानी के सैंपल टेस्ट में 27 स्थानों पर 33 तरह के बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली है. लैब जांच में अकेले वार्ड 12 लाइन नंबर 3 में सप्लाई हो रहे पानी में ही 33 तरह के बैक्टीरिया ट्रेस हुए हैं. अब निगम के अफसरों ने पेयजल के 27 सैंपल जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला पीएचई की एनएबीएल अधिकृत लैब को बैक्टीरियल जांच के लिए भेजे हैं.

लिवर और किडनी से जुड़ी बीमारी का खतरा 

पानी की जांच के बाद साफ हो गया है कि ग्वालियर शहर के कई इलाकों में लोग बैक्टीरिया युक्त गंदा पानी पी रहे हैं. ऐसे में उनके बीमार होने का भी खतरा है. डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी पीने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द, हैजा और डायरिया की शिकायत हो सकती है्. साथ ही अगर दूषित पानी लंबे समय तक पिया जाए तो इससे लीवर और किडनी में भी संक्रमण के साथ गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है.

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भाजपा पार्षद बोले- सुनवाई नहीं हो रही 

बैक्टीरिया युक्त पानी की सप्लाई से क्षेत्रीय जनता के साथ-साथ पार्षद भी परेशान हैं. भाजपा पार्षद ब्रजेश श्रीवास का कहना है कि नगर निगम इस मामले में पूरी तरह लापरवाह है. मेरे खुद के वार्ड में लोग सीवर का पानी पी रहे हैं. मैं सड़क से लेकर परिषद तक यह मामला उठा चुका हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

पानी पीने योग्य, सैंपल जांच के लिए भेज  

निगम आयुक्त संघप्रिय पानी को पीने योग्य बता रहे हैं, हालांकि, उनका कहना है कि पानी में बैक्टीरिया की जांच के लिए अब तक एनएबीएल लैब में 19 सैंपल भेजे जा चुके हैं. 

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सुधार किया जा रहा है 

मेयर डॉ शोभा सिकरवार का कहना है कि नगर निगम ने जगह-जगह से सैंपल लेकर जांच शुरू कर दी है. जहां गंदे पानी की समस्या है, उसे चिन्हित कर सुधार किया जा रहा है.

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