गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत उत्सव है. मध्य प्रदेश के खंडवा में यह पर्व कुछ अलग ही रूप में दिखाई देता है. यहां देश ही नहीं, विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु अपने गुरु दादाजी धूनीवाले (स्वामी केशवानंदजी महाराज) के प्रति आस्था व्यक्त करने पहुंचते हैं. खास बात यह है कि खंडवा शहर इन श्रद्धालुओं का स्वागत किसी मेहमान की तरह नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह करता है. गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पूरा शहर सेवा, समर्पण और सत्कार की मिसाल बन जाता है.
गुरु दर्शन के लिए उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब
गुरु पूर्णिमा के मौके पर बड़ी संख्या में भक्त दादाजी धूनीवाले की समाधि पर माथा टेकने और आशीर्वाद प्राप्त करने खंडवा पहुंचते हैं. आस्था से भरे इन श्रद्धालुओं के लिए यह दिन बेहद खास होता है. दूर-दराज से आने वाले लोगों के कारण पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूब जाता है और हर तरफ गुरु महिमा के जयकारे सुनाई देते हैं.
शहरभर में लगते हैं सैकड़ों भंडारे
गुरु पूर्णिमा के दौरान खंडवा की लगभग हर गली, मोहल्ले और प्रमुख मार्ग पर निशुल्क भंडारों का आयोजन किया जाता है. शहर के चारों दिशाओं में सेवा केंद्र स्थापित किए जाते हैं, जहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन और जलपान की व्यवस्था रहती है. बताया जाता है कि पूरे शहर में 500 से अधिक भंडारे और सेवा केंद्र संचालित होते हैं.

सभी समाज के लोग भक्तों की सेवा में लगे.
भोजन से लेकर मिठाइयों तक की विशेष व्यवस्था
इन भंडारों में श्रद्धालुओं के लिए एक से बढ़कर एक व्यंजन तैयार किए जाते हैं. चाय, नाश्ते, भोजन और मिठाइयों के साथ-साथ ड्राय फ्रूट्स की भी व्यवस्था की जाती है. इतना ही नहीं, बच्चों के लिए चॉकलेट और आइसक्रीम जैसी चीजें भी उपलब्ध कराई जाती हैं. सेवा का भाव इतना गहरा होता है कि कोई भी श्रद्धालु बिना सत्कार के यहां से नहीं गुजरता.
निशुल्क वाहन और चिकित्सा सुविधा भी
खंडवा में गुरु पूर्णिमा पर केवल भोजन की ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जाता है. श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए निशुल्क वाहनों की व्यवस्था होती है. वहीं किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए चिकित्सा सेवाएं भी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि बाहर से आए भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.
इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सेवा कार्यों में समाज के सभी वर्गों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. जाति, धर्म और सामाजिक भेदभाव से परे होकर लोग एक ही उद्देश्य से जुटते हैं, श्रद्धालुओं की सेवा और उनका सम्मान. यही भावना खंडवा की गुरु पूर्णिमा को खास बनाती है.

भक्तों के लिए पूरे खंडवा में हो रहे भंडारे.
हजारों सेवादार संभालते हैं व्यवस्थाएं
गुरु पूर्णिमा के दौरान हजारों स्वयंसेवक और सेवादार अलग-अलग सेवा केंद्रों पर अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं. कोई भोजन परोसता है, कोई पानी पिलाता है, तो कोई यातायात और चिकित्सा सेवाओं में सहयोग करता है. सेवा की यही परंपरा वर्षों से खंडवा की पहचान बनी हुई है.
आस्था, सेवा और संस्कार का अनूठा संगम
खंडवा में गुरु पूर्णिमा का आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, अतिथि सत्कार और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है. यहां आने वाला हर श्रद्धालु अपने साथ केवल आध्यात्मिक अनुभव ही नहीं, बल्कि प्रेम, अपनापन और सेवा का भाव भी लेकर लौटता है. यही वजह है कि गुरु पूर्णिमा पर खंडवा की पहचान देशभर में एक विशेष स्थान रखती है.