MP में शुरू हुआ एशिया का सबसे आधुनिक तकनीक युक्त जिओ म्यूजियम, जानें क्या है इसकी खासियत?

Geo Museum: जिओ म्यूजियम में दो गैलरी बनाई गई है. इसमें पृथ्वी का जन्म, डायनासौर का दौर, पृथ्वी का सेंट्रल कोर, दुनिया भर के बेशकीमती जेम्स स्टोन से जुड़ी जानकारियां मिल सकेंगी.

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देश ही नहीं बल्कि एशिया का पहला जिओ म्यूजियम ग्वालियर में शुरू हो गया है. लगभग 35 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया यह म्यूजियम देश मे एकदम अनूठा है. इसमें भूगर्भ से जुड़े अनेक रहस्य उजागर होंगे. इसका लोकार्पण उपराष्ट्रपति जयदीप धनखड़ ने रविवार को ग्वालियर में किया. इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई मंत्री मौजूद थे. 

यह न केवल देश बल्कि दुनियाभर के लोगो के किये आकर्षण का केंद्र बनेगा. माना जा रहा है कि फरवरी के अंतिम या मार्च के पहले सप्ताह में प्रधानांमन्त्री अपने प्रस्तावित ग्वालियर दौरे के समय इसका उदघाटन कर सकते है.

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2019 में रखी गई थी जियोलॉजिकल म्यूजियम की आधारशिला

देश के पहले और इकलौते जियोलॉजिकल म्यूजियम की आधारशिला वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर 9 मार्च 2019 को तब रखी थी, जब वे केंद्रीय खनन मंत्री थे. तब से लगातार महाराजबाड़े  पर इस पर काम चल रहा था. 35 करोड़ की लागत से तैयार हो चुकी जिओ गैलरी को जिओलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) को सुपुर्द की गई. लम्बे समय से इसके लोकार्पण की प्रतीक्षा थी, लेकिन आज यह आम लोगों के दीदार के लिए खोल दिए गए. 

जिओ म्यूजियम की खासियत

इस म्यूजियम में दो गैलरी बनाई गई है. इसमें पृथ्वी का जन्म, डायनासौर का दौर, पृथ्वी का सेंट्रल कोर, दुनिया भर के बेशकीमती जेम्स स्टोन से जुड़ी जानकारियां मिल सकेंगी. बताया गया कि इसमें तैयार दो गैलरियों में एक गैलरी एवोल्यूशन ऑफ अर्थ और दूसरी गैलरी एवोल्यूशन ऑफ लाइफ पर केंद्रित हैं. इसमें ज्वालामुखी से लेकर अन्य भूगर्भ से जुड़ी गतिविधियों से जुड़ी तमाम जिज्ञाषाएँ शांत हो जाएंगी.

सैलानियों के लिए यहां है बहुत कुछ...

1. मयूजियम में एंट्री करते ही हाथी के सिर से लेकर दांत तक का विशाल हिस्सा लटका दिखता है. यह एकदम हकीकत का अहसास कराता है.

2. चुटकी बजाते ही ज्ञानवर्धक चीजों की जानकारी देने वाली स्क्रीन चालू हो जाती है.

3. पृथ्वी की गहराई जानने के लिए लगी स्क्रीन के बगल में ही चक्का लगा है. इसके घूमते ही दर्शक पृथ्वी की गहराई तक जान सकते हैं.

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4. गुजरात के कच्छ में आये भूकम्प की तीब्रता कितनी और कैसी थी यह जानने ले लिए इसमे बने ट्रॉली नुमा प्लेटफार्म पर चढ़कर पर्यटक उसकी तीब्रता को माप सकते हैं.

5. दर्शक यहां ज्वालामुखी फूटने की प्रक्रिया को सजीव देखा जा सकता है. 

6. इस म्यूजियम में हिमालय के जीवाश्म चट्टाने और डायनासौर के अंडे भी दीर्घा में रखे  है जिनजे दर्शक देख सकते हैं.

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7. प्रदर्शनी को मल्टीमीडिया ,चट्टानों , खनिजों और जीवश्म नमूनों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है.

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