Ram Temple Donation Case: अयोध्या स्थित राम मंदिर को मिले दान और चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh Statement) ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किए जाने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले की जवाबदेही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की है तथा ये संगठन आरोपियों को बचाने में लगे हैं. दिग्विजय सिंह ने कहा कि भगवान राम और सनातन धर्म में आस्था रखने वाले लोग कथित अनियमितताओं को स्वीकार नहीं करेंगे और कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी.
चंपत राय की गिरफ्तारी की मांग
शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा और चढ़ावा प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए. उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी जांच की मांग उठाई.
Ujjain, Madhya Pradesh: On the resignation of Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust General Secretary Champat Rai and trustee Anil Mishra, Congress leader Digvijaya Singh says, "It should definitely happen, that is our demand. An FIR should be registered, and Champat Rai and… pic.twitter.com/e6CdLHgzEx
— IANS (@ians_india) June 27, 2026
भाजपा, आरएसएस और विहिप पर लगाए आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में भाजपा, आरएसएस और विहिप की नैतिक जिम्मेदारी बनती है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों की भगवान राम और सनातन धर्म में आस्था है, वे कथित तौर पर दान और चढ़ावे से जुड़े विवादों को स्वीकार नहीं करेंगे. उनके मुताबिक धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है.
FIR दर्ज होने के बाद तेज हुई राजनीतिक बहस
राम मंदिर से जुड़े कथित दान और चढ़ावा प्रकरण में पहले ही पुलिस कार्रवाई हो चुकी है. इस मामले में ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. एफआईआर में चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया. बाद में गिरफ्तार किए गए आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. इसी कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है.
#WATCH | Ujjain, Madhya Pradesh: On the alleged Ram Mandir donation embezzlement case, Congress leader Digvijaya Singh says, "...The issue involves corruption in the land purchase, in the donations we gave, 200 kg silver bricks donated by the Sindhi community, jewellery donated… pic.twitter.com/5vw6xKCYLm
— ANI (@ANI) June 27, 2026
अखिलेश यादव ने भी उठाया था मुद्दा
इस प्रकरण को सबसे पहले प्रमुखता से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उठाया था. उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए मामले की न्यायिक जांच की मांग की थी. इसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया. विवाद बढ़ने के बाद मामले की विशेष जांच की मांग भी उठी थी.
सीएम योगी के निर्देश पर बनी थी SIT
दान और चढ़ावे से जुड़े कथित मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी ने मामले की जांच की. जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की. फिलहाल जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर कानूनी प्रक्रिया जारी है.
कांग्रेस गांव-गांव उठाएगी मुद्दा
दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस या राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रखेगी. उन्होंने बताया कि पार्टी इस विषय को लेकर वार्ड स्तर से लेकर जिला स्तर तक समितियां गठित करेगी और गांव-गांव जाकर लोगों को जानकारी देगी. कांग्रेस का दावा है कि वह इस मुद्दे को जनजागरण अभियान के रूप में उठाएगी.
धार्मिक संस्थाओं के संचालन पर भी सवाल
अपने बयान में दिग्विजय सिंह ने आरएसएस और विहिप की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक संस्थाओं और परंपराओं के संचालन को लेकर पारदर्शिता की जरूरत है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से बड़ी संख्या में परिवारों द्वारा चंदा दिया गया था, इसलिए उसके उपयोग का स्पष्ट हिसाब सामने आना चाहिए.
जांच और राजनीति दोनों पर नजर
राम मंदिर से जुड़े इस मामले में जहां जांच एजेंसियां कानूनी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं, वहीं राजनीतिक दल इसे लेकर लगातार बयान दे रहे हैं. दिग्विजय सिंह के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है. अब आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी.
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