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धीरेंद्र शास्त्री की शादी कब? NDTV से किया खुलासा, बाबा ने खुद बताया वेडिंग प्लान

Dhirendra Shastri Wedding Plan: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने NDTV से बातचीत में अपनी शादी को लेकर जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि होली के बाद उनका गृहस्थ जीवन शुरू हो सकता है और शादी की तारीख़ उनकी मां तय करेंगी. बाबा ने यह भी स्पष्ट किया कि संत राजनीति में जा सकते हैं. लेकिन वे स्वयं राजनीति में नहीं जाएंगे और उनका उद्देश्य समाज सेवा है.

धीरेंद्र शास्त्री की शादी कब? NDTV से किया खुलासा, बाबा ने खुद बताया वेडिंग प्लान

Dhirendra Shastri Wedding Plan: क्‍या धीरेंद्र शास्त्री करने जा रहे हैं? क्‍या वे होली के बाद दूल्‍हा बनने वाले हैं? इसका जवाब खुद धीरेंद्र शास्त्री ने दिया है. उन्होंने NDTV से बातचीत में शादी को लेकर अपने विचार साझा किए हैं. साथ ही अपना वेडिंग प्लान भी बताया है.

धीरेंद्र शास्त्री की शादी की बात होली के बाद ही पक्‍की होने वाली है क्‍या? इस पर उन्होंने कहा कि उनकी शादी की चर्चा बहुल सालों से हो रही है. "मां तय कर रही हैं. देखते हैं मां कहां आज्ञा देती हैं. जल्द ही खुशखबरी मिलेगी."

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने शादी के सवाल पर कहा, "हमें लगता है कि यह कोई बुरा काम नहीं है. होली के रंगों के बीच जीवन का यह भी एक रंग है कि हम जल्द ही गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने वाले हैं."

संतों पर नहीं करना चाहते टिप्पणी

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हम कभी भी संतों पर टिप्पणी नहीं करते. कोई भी प्रतिक्रिया भी नहीं देते. "क्योंकि हम उस लायक नहीं हैं. लेकिन इतना कहना चाहेंगे कि हमारे गांव में एक कहावत है कि अपना कपड़ा निकालने से अपनी ही बेइज्जती होती है. यह बात सनातन के प्रत्येक व्यक्ति को समझना बहुत जरूरी है. संत अगर आपस में ही हिंदू-हिंदू लड़ेंगे तो हम कुरीतियों से कब लड़ पाएंगे, विरोधी ताकतों से कब लड़ पाएंगे. हम आपस में ही अपनी ऊर्जा खत्म कर देंगे तो देशद्रोहियों से कैसे लड़ पाएंगे." 

संत को राजनीति में जाना चाहिए?

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि संतों को बिल्कुल राजनीति में जाना चाहिए. "जब चोर-उचके राजनीति में जा सकते हैं तो संत क्यों नहीं." मगर उनकी निजी इच्छा है कि वे कभी राजनीति में नहीं जाना चाहते. उनका ध्यान सामूहिक कन्या विवाह और कैंसर अस्पताल बनाकर समाज में योगदान देने पर है. श्रद्धालु उन्हें भगवान मानते हैं. इस पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, "हमें ईश्वर बनने का शौक नहीं. ना हम ईश्वर हैं और ना बन सकते. इंसान इंसान ही होता है और ईश्वर ईश्वर ही." 

कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ और टोकन व्यवस्था

कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ को लेकर जब सवाल किया गया कि लोग आपसे मिलने के लिए कितने घंटे इंतजार करते हैं, तो बाबा बागेश्वर ने कहा, "हमारे पास केवल प्रार्थना है. हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं और गुरु परंपरा के अनुरूप लोगों को सनातन धर्म से अवगत कराते हैं. हमारा एक ही सिद्धांत है: खुले रहो और खिले रहो. आस्था उनके परिवार की है और हमारे पास है." 

उन्होंने बताया कि लोग 8–10 घंटे तक इंतजार करते हैं और वर्तमान में मिलने की टोकन व्यवस्था 6 महीने की वेटिंग पर चल रही है. जिन लोगों को 6 महीने पहले टोकन मिला था, उनका नंबर अब आ रहा है. बाबा बागेश्वर ने कहा, "हमारा उद्देश्य किसी को इंतजार कराना नहीं है, बल्कि यह है कि हम किसी की मुसीबत में कैसे काम आ सकते हैं. गुरु कृपा से जो समाधान मिलता है, वह लोगों तक पहुंचाना हमारा प्रयास है." उन्होंने सनातन परंपरा को मानने वाले सभी हिंदुओं से आह्वान किया कि सनातन धर्म में ही उपचार और निदान की अपार शक्ति है.

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